जबलपुर। मध्यप्रदेश में विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की उच्च शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में सरकार ने तैयारी शुरू कर दी है। प्रदेश के इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर को इस पहल से जोड़ने की योजना पर काम किया जा रहा है। इसके लिए उच्च शिक्षा विभाग ने सितंबर 2026 में प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंसी की नियुक्ति के लिए निविदा जारी की है।
यह पहल ऐसे समय में सामने आई है, जब विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने अगस्त 2026 तक देश में विदेशी उच्च शिक्षण संस्थानों के परिसरों की स्थापना के लिए 15 संस्थानों को 16 लेटर ऑफ इंटेंट जारी किए हैं। इनमें बेंगलुरु, मुंबई, गुरुग्राम और चेन्नई जैसे शहर शामिल हैं। फिलहाल मध्यप्रदेश का कोई शहर इस केंद्रीय सूची में शामिल नहीं है।
अंतरराष्ट्रीय संस्थानों से साझेदारी पर जोर
प्रदेश सरकार की ओर से प्रस्तावित परामर्श व्यवस्था का मतलब सीधे किसी विदेशी विश्वविद्यालय को परिसर खोलने की मंजूरी देना नहीं है। इसके जरिए विदेश के शिक्षण संस्थानों के साथ शैक्षणिक सहयोग, शोध परियोजनाओं, विद्यार्थियों के आदान-प्रदान और अन्य अकादमिक गतिविधियों की संभावनाओं का अध्ययन किया जाएगा।
सरकार का उद्देश्य प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाना और विद्यार्थियों को देश के बाहर उपलब्ध अवसरों के समान सुविधाएं राज्य में ही उपलब्ध कराना है।
शहरों के लिए अलग-अलग क्षेत्रों पर विचार
प्रस्तावित योजना में चारों शहरों की शैक्षणिक क्षमता और स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखकर अलग-अलग क्षेत्रों पर विचार किया जा रहा है। इंदौर में उद्योग और प्रबंधन से जुड़े पाठ्यक्रमों की संभावनाएं देखी जा रही हैं। भोपाल में तकनीकी शिक्षा और शोध को प्राथमिकता देने पर विचार है।
ग्वालियर में विदेशी संस्थानों के साथ अकादमिक सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं का अध्ययन किया जा रहा है। वहीं जबलपुर के लिए विज्ञान, इंजीनियरिंग और पर्यावरण से जुड़े शोध क्षेत्रों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अधिकारियों और जानकारों के अनुसार यदि भविष्य में विदेशी संस्थानों के साथ इस तरह की साझेदारी आगे बढ़ती है तो प्रदेश के विद्यार्थियों को उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा के नए विकल्प मिल सकते हैं। साथ ही स्थानीय शिक्षण संस्थानों में भी बेहतर पाठ्यक्रम और सुविधाएं विकसित करने की प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है। हालांकि विदेशी संस्थानों की फीस अधिक होने पर इन अवसरों का लाभ सीमित विद्यार्थियों तक ही पहुंचने की संभावना भी रहेगी।
