जबलपुर। महाकौशल के सबसे बड़े नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज-अस्पताल में नई बिल्डिंग बनाने की योजना लंबे समय से आगे नहीं बढ़ पा रही है। करीब 1300 करोड़ रुपए की लागत से 3 हजार से अधिक बेड वाले नए अस्पताल की योजना प्रस्तावित है, लेकिन इसकी डीपीआर पिछले करीब छह महीने से अंतिम मंजूरी का इंतजार कर रही है।
दूसरी ओर, मेडिकल कॉलेज का मौजूदा भवन करीब 70 साल पुराना होने के कारण जर्जर स्थिति में पहुंच चुका है। कई जगह छत से प्लास्टर गिरने, दीवारों में सीलन और बारिश के दौरान वार्डों में पानी टपकने की समस्या सामने आ रही है। कमजोर हिस्सों को फिलहाल लोहे की गर्डर और सपोर्ट देकर संभाला जा रहा है।
दो बार बनी डीपीआर, दोनों पर लगी आपत्ति
कॉलेज प्रबंधन के अनुसार, नए भवन के लिए लोक निर्माण विभाग ने अब तक दो बार डीपीआर तैयार की। पहली डीपीआर में पार्किंग और फायर सेफ्टी से जुड़े मानकों को लेकर आपत्ति सामने आई थी। इसके बाद दूसरी डीपीआर तैयार की गई, जिसमें परियोजना की लागत करीब 1300 करोड़ रुपए आंकी गई।
अब डीपीआर में दोबारा संशोधन किया जा रहा है। फाइल स्वास्थ्य चिकित्सा शिक्षा संचालनालय, भोपाल में लंबित बताई जा रही है। मंजूरी के बाद ही आगे बजट और निर्माण की प्रक्रिया शुरू हो सकेगी।
1955 में बना भवन अब जर्जर
मेडिकल कॉलेज का मुख्य भवन वर्ष 1955 में बनाया गया था। समय के साथ भवन की हालत खराब होती गई है। पिछले महीने सर्जरी वार्ड नंबर चार और पांच में छत का हिस्सा गिर गया था। हालांकि घटना में किसी के हताहत होने की जानकारी नहीं है।
बारिश के दौरान अस्पताल के करीब आठ वार्डों में पानी टपकने की समस्या भी सामने आती है। इसके चलते कई बार मरीजों को दूसरे बेड पर शिफ्ट करना पड़ता है। अस्पताल की इलेक्ट्रिक वायरिंग भी करीब 30 साल पुरानी बताई जा रही है और पहले शॉर्ट सर्किट की घटनाएं हो चुकी हैं।
कमजोर हिस्सों में लगाई जा रही गर्डर
भवन की स्थिति को देखते हुए कमजोर हिस्सों को अस्थायी रूप से मजबूत करने के लिए लोहे की गर्डर लगाई जा रही हैं। अस्पताल सूत्रों के अनुसार मेडिसिन, सर्जरी और आर्थोपेडिक वार्ड के कुछ पिलर कमजोर हो चुके हैं।
गर्डर और अन्य सपोर्ट से भवन को फिलहाल सहारा दिया जा रहा है, लेकिन इसे स्थायी समाधान नहीं माना जा रहा है। नए भवन के निर्माण को ही लंबे समय के लिए जरूरी बताया जा रहा है।
नए भवन में सभी सुविधाएं एक परिसर में होंगी
प्रस्तावित नए भवन में मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के विभिन्न विभागों को एकीकृत तरीके से विकसित करने की योजना है। इसमें आधुनिक ऑपरेशन थिएटर, आईसीयू, कैजुअल्टी, रिसर्च लैब और अन्य आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं शामिल की जानी हैं।
हालांकि डीपीआर में लागत, डिजाइन और उपलब्ध जमीन के उपयोग को लेकर तकनीकी स्तर पर बदलाव और आपत्तियों के कारण प्रक्रिया आगे बढ़ने में समय लग रहा है। जब तक नई योजना को अंतिम मंजूरी नहीं मिलती, तब तक मरीजों और अस्पताल स्टाफ को पुराने भवन में ही काम करना होगा।