जबलपुर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने इतिहास विषय के असिस्टेंट प्रोफेसर पदों की चयन प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। न्यायमूर्ति विशाल धगट की एकलपीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि याचिका के लंबित रहने के दौरान होने वाली नियुक्तियां हाई कोर्ट के अंतिम आदेश के अधीन रहेंगी।
2025 में जारी हुआ था भर्ती विज्ञापन
मामला विमल कुमार तिवारी व अन्य बनाम मध्य प्रदेश शासन व अन्य से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता सतेंद्र ज्योतिषी ने कोर्ट को बताया कि मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग ने वर्ष 2025 में इतिहास विषय में असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों के लिए भर्ती विज्ञापन जारी किया था।
याचिका दायर करने वाले अभ्यर्थियों के अनुसार वे लंबे समय से विभिन्न महाविद्यालयों में अतिथि विद्वान के रूप में सेवाएं दे रहे हैं।
चयन प्रक्रिया पर उठाए सवाल
याचिका में चयनित अभ्यर्थियों की मार्किंग और उनके द्वारा आवेदन में दी गई जानकारी को लेकर आपत्तियां उठाई गई हैं। याचिकाकर्ताओं ने चयन प्रक्रिया को नियमों के अनुरूप नहीं होने का दावा किया है।
इसके अलावा पात्र अतिथि विद्वानों के लिए निर्धारित 25 प्रतिशत प्रावधान का कथित रूप से अनुचित लाभ दिए जाने का मुद्दा भी याचिका में उठाया गया है।
नियुक्तियां अंतिम फैसले के अधीन रहेंगी
प्रारंभिक सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि याचिका लंबित रहने के दौरान यदि नियुक्तियां की जाती हैं, तो वे हाई कोर्ट के अंतिम आदेश के अधीन रहेंगी।