जबलपुर। यूपीआई भुगतान पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट के विरोध में बुधवार को शहर के कई व्यापारिक संगठनों ने ‘नो यूपीआई डे’ मनाया। इस दौरान व्यापारियों ने दुकानों पर लगे यूपीआई क्यूआर कोड और भुगतान उपकरणों को ढककर विरोध दर्ज कराया। कुछ व्यापारियों ने 2000 रुपए से अधिक के भुगतान भी यूपीआई के जरिए लेने से इनकार किया।
व्यापारियों ने लागत बढ़ने की जताई चिंता
व्यापारिक संगठनों का कहना है कि यूपीआई भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क लागू होने से कारोबार की लागत बढ़ सकती है। खासतौर पर कम मुनाफे वाले कारोबार पर इसका सीधा असर पड़ने की बात व्यापारियों ने कही है। विरोध के दौरान ग्राहकों से अन्य माध्यमों से भुगतान करने के लिए कहा गया।
थोक बाजार में ऑनलाइन भुगतान रोका
जबलपुर थोक वस्त्र व्यापारी संगठन के अध्यक्ष नवनीत जैन के अनुसार संगठन से जुड़े करीब 140 व्यापारियों ने ‘नो यूपीआई डे’ में हिस्सा लिया। उन्होंने बताया कि थोक बाजार में रोजाना करीब 90 लाख से एक करोड़ रुपए का कारोबार ऑनलाइन भुगतान के जरिए होता है।
बुधवार को व्यापारियों ने यूपीआई भुगतान स्वीकार नहीं किया। दुकानों पर लगे क्यूआर कोड को कवर कर दिया गया और ग्राहकों से दूसरे भुगतान माध्यमों का इस्तेमाल करने के लिए कहा गया।
दवा कारोबारियों समेत अन्य संगठनों ने भी जताया विरोध
दीनदयाल दवा व्यापारी संगठन के चंद्रेश जैन ने बताया कि उनके संगठन ने भी विरोध में सहभागिता की। मुकादमगंज व्यापारी संगठन, बैगिंग एसोसिएशन सहित अन्य व्यापारिक संगठनों में भी प्रस्तावित शुल्क को लेकर विरोध जताया गया।
चैंबर जुटा रहा प्रस्तावित शुल्क की जानकारी
महाकोशल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के मानसेवी मंत्री अखिल मिश्रा ने बताया कि संगठन प्रस्तावित यूपीआई शुल्क से जुड़े प्रावधानों और इसके कारोबार पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव की जानकारी जुटा रहा है। इसके बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि शुल्क से व्यापारियों के हित प्रभावित होते हैं तो संगठन इसका विरोध करेगा।
16 से ज्यादा संगठनों के समर्थन का दावा
नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच की ओर से सिविक सेंटर में भी प्रदर्शन किया गया। मंच के डॉ. पी. जी. नाजपांडे ने दावा किया कि 16 से अधिक संगठन प्रस्तावित यूपीआई शुल्क व्यवस्था के विरोध में हैं। मंच और अन्य जनसंगठनों ने इससे पहले 23 सितंबर को ‘नो यूपीआई डे’ मनाने की घोषणा की थी।
15 अक्टूबर से प्रस्तावित शुल्क की चर्चा
उपलब्ध जानकारी के अनुसार 15 अक्टूबर से 2000 रुपए से अधिक के पात्र पर्सन-टू-मर्चेंट यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत तक मर्चेंट डिस्काउंट रेट प्रस्तावित होने की बात कही जा रही है। इसी प्रस्ताव के विरोध में व्यापारिक संगठनों ने बुधवार को सांकेतिक प्रदर्शन किया।