जबलपुर। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में प्रशासनिक स्तर पर चल रही खींचतान का असर अब शैक्षणिक व्यवस्थाओं पर पड़ने के आरोप सामने आ रहे हैं। विश्वविद्यालय से जुड़े मामलों में संबद्ध महाविद्यालयों की मान्यता और परीक्षा प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि सत्र 2025-26 में कई संबद्ध महाविद्यालयों को वैधानिक संबद्धता प्रमाण पत्र जारी किए बिना ही परीक्षाएं करा दी गईं और बाद में परिणाम भी घोषित कर दिए गए।
संबद्धता के बिना परीक्षा कराने का आरोप
नियमानुसार महाविद्यालयों में विद्यार्थियों के प्रवेश, शैक्षणिक गतिविधियों और परीक्षा से पहले संबद्धता का नवीनीकरण जरूरी होता है। इसके बावजूद संबद्धता प्रमाण पत्र जारी किए बिना परीक्षा आयोजित कराने और परिणाम घोषित करने की प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं।
विश्वविद्यालय के नियमित शैक्षणिक कैलेंडर में भी करीब छह महीने की देरी बताई जा रही है। जानकारों का कहना है कि व्यवस्थाओं को पूरी तरह सामान्य स्थिति में लाने में समय लग सकता है।
छात्रों के भविष्य को लेकर चिंता
संबद्धता की औपचारिक प्रक्रिया पूरी किए बिना परीक्षा और परिणाम जारी किए जाने से बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के भविष्य को लेकर चिंता पैदा हो गई है। छात्र संगठनों और शिक्षाविदों की ओर से भी इस मामले में सवाल उठाए जाने की बात सामने आई है।
डिग्री की वैधता पर भी सवाल
मामले में सबसे बड़ा सवाल उन परीक्षाओं और परिणामों की वैधानिक स्थिति को लेकर है, जिनके समय महाविद्यालयों की संबद्धता प्रक्रिया पूरी नहीं हुई थी। जानकारों के मुताबिक भविष्य में यदि इस प्रक्रिया की कानूनी या प्रशासनिक जांच होती है तो संबंधित विद्यार्थियों की अंकसूची और डिग्री की मान्यता को लेकर स्थिति स्पष्ट करनी पड़ सकती है।
विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इस पूरे मामले में क्या प्रक्रिया अपनाई गई और संबद्धता प्रमाण पत्र कब जारी किए गए, इसे लेकर आधिकारिक स्थिति सामने आना बाकी है।
