जबलपुर। शहर में खुले दूध की कीमत एक बार फिर बढ़ गई है। निजी डेयरी संचालकों और घर-घर दूध पहुंचाने वाले विक्रेताओं ने दूध के दाम में 2 से 5 रुपए प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी कर दी है। नई दरें लागू होने के बाद खुले दूध की कीमत अब 80 से 82 रुपए प्रति लीटर तक पहुंच गई है। अचानक बढ़े दामों का असर सीधे घरेलू बजट पर पड़ रहा है।
जबलपुर में बड़ी संख्या में लोग पैकेट वाले दूध के साथ स्थानीय डेयरियों और दूध विक्रेताओं पर निर्भर हैं। ऐसे में बिना किसी पूर्व सूचना के कीमत बढ़ाए जाने से उपभोक्ताओं में नाराजगी है। कई लोगों का कहना है कि जब उन्होंने विक्रेताओं से बढ़े हुए दाम का कारण पूछा तो उन्हें साफ तौर पर बताया गया कि नई दरें लागू हो चुकी हैं। कम कीमत में दूध लेने पर गुणवत्ता की गारंटी नहीं होने की बात भी कही गई।
घर का बजट बिगड़ा
दूध की कीमत बढ़ने से मध्यमवर्गीय और कम आय वाले परिवारों पर अतिरिक्त खर्च का बोझ बढ़ गया है। बच्चों, बुजुर्गों और नियमित रूप से दूध की जरूरत वाले परिवारों के लिए रोजाना का खर्च बढ़ गया है। घरों तक दूध पहुंचाने वाले कई हॉकर्स ने बिना पहले से जानकारी दिए बढ़ी हुई कीमत पर दूध देना शुरू कर दिया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि उपभोक्ताओं के पास सीमित विकल्प हैं। सांची सहित पैकेटबंद दूध बाजार में उपलब्ध है, लेकिन बड़ी आबादी लंबे समय से स्थानीय डेयरियों और दूधियों से दूध लेती आ रही है।
पहले भी कई बार बढ़ चुके हैं दाम
स्थानीय उपभोक्ताओं के अनुसार करीब छह महीने पहले गर्मी के दौरान चारा और दाना महंगा होने का हवाला देकर दूध के दाम में 2 से 4 रुपए तक की बढ़ोतरी की गई थी। अब ठंड का मौसम शुरू होने के बाद दूध उत्पादन बढ़ने के बावजूद कीमतें कम होने के बजाय फिर बढ़ा दी गई हैं।
जनवरी 2025 में जहां खुले दूध की कीमत करीब 58 से 60 रुपए प्रति लीटर थी, वहीं इसके बाद अलग-अलग चरणों में भाव 65, 68, 72, 74 और 78 रुपए तक पहुंच गए। अब नई बढ़ोतरी के बाद दूध 80 से 82 रुपए प्रति लीटर तक बिक रहा है।
मिलावट की जांच को लेकर भी सवाल
दूध की कीमत बढ़ने के साथ ही उपभोक्ताओं ने उसकी गुणवत्ता और मिलावट की जांच को लेकर भी सवाल उठाए हैं। शहरवासियों का कहना है कि दूध के नमूनों की नियमित जांच होनी चाहिए, ताकि उपभोक्ताओं को सही गुणवत्ता वाला दूध मिल सके।
नागरिकों ने जिला प्रशासन और खाद्य सुरक्षा विभाग से दूध की कीमतों और गुणवत्ता दोनों की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि कहीं नियमों के विपरीत कीमत वसूली जा रही है या दूध में मिलावट पाई जाती है तो संबंधित विक्रेताओं पर कार्रवाई की जानी चाहिए।
दूध महंगा होने का असर केवल घरों तक सीमित नहीं रहेगा। दूध से बनने वाले दही, पनीर और मिठाइयों की कीमतों पर भी इसका असर पड़ सकता है। इसके अलावा चाय और अन्य दूध आधारित खाद्य पदार्थों की कीमतें भी बढ़ने की संभावना है।
