जबलपुर। शहर की पहचान मानी जाने वाली बैलेंसिंग रॉक इन दिनों बदहाली से जूझ रही है। प्राकृतिक रूप से संतुलित इस चट्टान के आसपास लंबे समय से सफाई नहीं होने और लगातार बढ़ रहे अतिक्रमण को लेकर सामाजिक संगठनों में नाराजगी बढ़ गई है। संरक्षण की मांग को लेकर विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ताओं ने पर्यटन विभाग के कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन किया और जिम्मेदार विभागों के खिलाफ नारेबाजी की।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जबलपुर आने वाले पर्यटकों के लिए बैलेंसिंग रॉक प्रमुख आकर्षणों में शामिल है। इसके बावजूद इसके आसपास की स्थिति लगातार खराब हो रही है। झाड़ियों और कचरे के कारण कई हिस्से ढंक गए हैं, जबकि आसपास अवैध कब्जे बढ़ने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं।
पर्यटन और स्थानीय कारोबार पर असर की चिंता
व्यापार, उद्योग और होटल कारोबार से जुड़े प्रतिनिधियों ने भी बैलेंसिंग रॉक की अनदेखी पर चिंता जताई। उनका कहना है कि यह स्थान जबलपुर के पर्यटन क्षेत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यदि प्राकृतिक धरोहर का संरक्षण नहीं किया गया तो इसका असर शहर में आने वाले पर्यटकों की संख्या के साथ स्थानीय कारोबार पर भी पड़ सकता है।
सामाजिक संगठनों ने प्रशासन और पर्यटन विभाग से क्षेत्र की नियमित सफाई कराने, अतिक्रमण हटाने और चट्टान के आसपास उचित संरक्षण व्यवस्था विकसित करने की मांग की है।
ऐतिहासिक धरोहरों से जुड़ा क्षेत्र
सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. पीजी नाजपांडे ने कहा कि बैलेंसिंग रॉक के विकास में पर्यावरण और प्राकृतिक स्वरूप का ध्यान रखा जाना चाहिए। उनके अनुसार यह स्थान अकेली प्राकृतिक चट्टान नहीं है, बल्कि आसपास मौजूद कई ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों से जुड़े महत्वपूर्ण क्षेत्र का हिस्सा है।
बैलेंसिंग रॉक के आसपास मदन महल किला, मां शारदा देवी का प्राचीन मंदिर, देवताल का ऐतिहासिक मंदिर और ओशो आश्रम जैसे स्थल मौजूद हैं। संगठनों का कहना है कि इन सभी स्थानों को जोड़कर एक व्यव

