जबलपुर। शहर में बिजली व्यवस्था सुधारने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन कई कॉलोनियों और बस्तियों में अब भी बिजली लाइन बांस-बल्ली के सहारे चल रही है। कहीं जर्जर खंभों पर तारों का जाल लटका है तो कहीं मीटर सड़क किनारे खुले में लगे हुए हैं। कई स्थानों पर बिजली के तार जमीन से काफी कम ऊंचाई पर हैं, जिससे हादसे का खतरा बना रहता है।
आरडीएसएस जैसी योजनाओं के तहत बिजली लाइन और सब स्टेशन सुधारने पर काम किया जा रहा है, लेकिन शहर की 50 से ज्यादा कॉलोनियों में अब भी पुरानी और असुरक्षित व्यवस्था बनी हुई है। कई जगह ट्रांसफार्मर के आसपास ही दुकानें और दूसरे कारोबार चल रहे हैं। इससे बिजली उपकरणों के पास लोगों की आवाजाही बनी रहती है और दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है।
त्योहारों में सामने आती है लापरवाही
गणेशोत्सव के दौरान पंडालों की बिजली व्यवस्था की जांच में भी कई जगह कटे-फटे तार, खराब टेपिंग और कम ऊंचाई पर बिजली लाइन जैसी कमियां मिली थीं। कुछ स्थानों पर डेकोरेटरों ने भी सुरक्षित वायर का इस्तेमाल नहीं किया था। बिजली कंपनी ने ऐसे मामलों में कार्रवाई की, लेकिन पुराने और स्थायी बिजली नेटवर्क की नियमित निगरानी अब भी जरूरी है।
स्ट्रीट लाइट के खंभों के नीचे खुले तार
दमोह नाका, आईटीआई, सिविल लाइंस, मेडिकल रोड और सगड़ा क्षेत्र में स्ट्रीट लाइट, सेंट्रल लाइटिंग और हाईमास्ट के खंभों के नीचे खुले तार होने की शिकायतें सामने आती रही हैं। जानकारों के अनुसार बिजली के तारों और उपकरणों को सुरक्षित रखने के लिए सही इंसुलेशन, बंद बॉक्स, लॉकिंग और अर्थिंग जरूरी है।
घमापुर में सड़क किनारे खुले फ्यूज
आंबेडकर चौक से घमापुर मार्ग पर ब्यौहारबाग के पास ट्रांसफार्मर के नीचे सड़क किनारे खुले फ्यूज लगे हुए हैं। यहां से लोगों की आवाजाही रहती है और आसपास चाट-फुल्की के ठेले भी लगते हैं। त्योहारों के दौरान भीड़ बढ़ने पर यह व्यवस्था और ज्यादा जोखिम भरी हो सकती है।
करमेता में नीचे लटक रही बिजली लाइन
पाटन रोड स्थित करमेता में ग्रैंड आईटीआई के पीछे रहवासी क्षेत्र में भी बिजली व्यवस्था अस्थायी नजर आती है। यहां कुछ उपभोक्ताओं के मीटर सड़क किनारे लगे हुए हैं और बिजली की केबल भी काफी नीचे है। रहवासियों के मुताबिक लंबे समय से स्थायी कनेक्शन और व्यवस्थित बिजली लाइन की जरूरत बनी हुई है।
करमेता के अलावा मेडिकल के आगे शास्त्री नगर, महाराजपुर बायपास और कछपुरा के गणेश नगर में भी बांस-बल्ली के सहारे बिजली लाइन चलने की बात सामने आई है। रहवासियों का कहना है कि अस्थायी व्यवस्था लंबे समय से बनी हुई है, लेकिन स्थायी पोल लगाने की दिशा में पर्याप्त काम नहीं हुआ।
बाजारों में तारों का जाल
फुहारा, अंधेरदेव और लार्डगंज के बाजारों में बिजली के पोल पर तारों का जाल बना हुआ है। किसी लाइन में खराबी आने पर उसे अलग करना भी मुश्किल हो जाता है। इन क्षेत्रों में शॉर्ट सर्किट की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं। वहीं कुछ बस्तियों में अवैध बिजली कनेक्शन की शिकायतें भी हैं।
बिजली व्यवस्था सुधारने के लिए योजनाओं के तहत लगातार काम हो रहा है, लेकिन शहर के ऐसे इलाकों में जहां आज भी अस्थायी पोल, खुले तार और असुरक्षित मीटर लगे हैं, वहां स्थायी समाधान और नियमित निगरानी की जरूरत है।
