जबलपुर। सतना जिले के कोठार-देवरा क्षेत्र में पत्थर तोड़ने वाले संयंत्रों और खनन गतिविधियों को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने सख्त रुख अपनाया है। एनजीटी ने आबादी क्षेत्र, मंदिर और नए या सरकारी निर्माण से 500 मीटर के दायरे में पत्थर तोड़ने वाले संयंत्रों के संचालन पर रोक के निर्देश दिए हैं।
13 संयंत्रों में केवल 7 के पास संचालन की अनुमति
एनजीटी की भोपाल स्थित केंद्रीय क्षेत्रीय पीठ ने 9 सितंबर को यह आदेश जारी किया। मामले की सुनवाई न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति एसके सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी ने की। यह मामला मूल आवेदन क्रमांक 60/2024 से जुड़ा है।
संयुक्त समिति की जांच में क्षेत्र में कुल 14 पत्थर तोड़ने वाले संयंत्र पाए गए। इनमें से एक पहले से बंद था। बाकी 13 संयंत्रों की जांच में केवल सात के पास संचालन की वैध सहमति मिली, जबकि छह के पास सिर्फ स्थापना की अनुमति थी या वे बिना वैध संचालन अनुमति के चल रहे थे।
धूल नियंत्रण की व्यवस्था भी मिली कमजोर
जांच के दौरान संयंत्रों के बीच औसत दूरी 100 मीटर से भी कम पाई गई। इसके अलावा धूल को नियंत्रित करने के इंतजाम भी पर्याप्त नहीं मिले। इसके बाद मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने 12 संयंत्रों के खिलाफ बंद करने और पर्यावरण क्षतिपूर्ति की कार्रवाई शुरू की।
रीवा-सतना प्रशासन करेगा संयुक्त सर्वे
एनजीटी ने यह भी स्पष्ट किया कि पुरानी पर्यावरण मंजूरी के आधार पर खनन गतिविधियां जारी नहीं रखी जा सकतीं। अधिकरण ने रीवा और सतना प्रशासन को क्षेत्र का संयुक्त सर्वेक्षण करने और निगरानी व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।