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23 सितंबर को रहेगा नो-यूपीआई डे, 2 हजार से ज्यादा के भुगतान नहीं लेने की अपील





जबलपुर/भोपाल। मध्य प्रदेश में 23 सितंबर को व्यापारियों की ओर से नो-यूपीआई डे मनाने का ऐलान किया गया है। इस दिन व्यापारी 2 हजार रुपये से अधिक का यूपीआई भुगतान नहीं लेने का सांकेतिक विरोध करेंगे। अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल ने प्रदेशभर के व्यापारियों से इस अभियान में शामिल होने की अपील की है।

व्यापार मंडल के अनुसार, व्यापारी कुछ समय के लिए अपने यूपीआई स्कैनर को काले कपड़े से ढंककर विरोध जताएंगे। व्यापारियों का कहना है कि 2 हजार रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर प्रस्तावित शुल्क से कारोबारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।

2 हजार से ज्यादा के भुगतान पर एमडीआर की चिंता

व्यापारियों के मुताबिक 15 अक्टूबर से 2 हजार रुपये से अधिक के पर्सन-टू-मर्चेंट यूपीआई भुगतान पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लगाए जाने की बात कही गई है। वहीं 75 हजार रुपये या उससे अधिक के लेन-देन पर शुल्क 300 रुपये तक होने का उल्लेख किया गया है।

प्रदेश के करीब 4700 पेट्रोल पंप संचालक भी 16 अक्टूबर से 2 हजार रुपये से ज्यादा के बिल का भुगतान यूपीआई के जरिए नहीं लेने का फैसला कर चुके हैं।

थोक बाजार में ज्यादातर भुगतान 2 हजार से ज्यादा

भोपाल के थोक किराना बाजार में करीब 500 थोक और खुदरा दुकानें हैं। व्यापारियों के अनुसार यहां से रोजाना बड़ी मात्रा में शकर, तेल, दाल, चावल और अन्य किराना सामान आसपास के करीब 150 किलोमीटर के क्षेत्र में भेजा जाता है।

अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेश महासचिव अनुपम अग्रवाल ने कहा कि भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर और सागर समेत प्रदेश के कई थोक बाजारों में 90 प्रतिशत से अधिक लेन-देन 2 हजार रुपये से ऊपर का होता है। ऐसे में अतिरिक्त शुल्क से व्यापारियों पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है।

कारोबारियों ने जताई आपत्ति

थोक किराना कारोबारी अनिल कुमार साहू का कहना है कि पहले व्यापारियों और ग्राहकों को डिजिटल और कैशलेस भुगतान की आदत डाली गई। अब यूपीआई भुगतान पर शुल्क लगाने से कारोबारियों की परेशानी बढ़ सकती है। उन्होंने कहा कि किराने का सामान खरीदने पर भी कई बार बिल 2 हजार रुपये से ज्यादा हो जाता है।

व्यापारियों का कहना है कि कई कारोबार में मुनाफा बहुत कम होता है। ऐसे में यूपीआई भुगतान पर लगने वाला अतिरिक्त शुल्क उनके लिए खर्च बढ़ाने वाला साबित हो सकता है। इसी के विरोध में 23 सितंबर को नो-यूपीआई डे के जरिए सांकेतिक विरोध करने की अपील की गई है।


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