जबलपुर। साइबर ठगी के तीन अलग-अलग मामले सामने आए हैं। ठगों ने कहीं बैंक कर्मचारी बनकर तो कहीं तहसीलदार बनकर लोगों को अपने जाल में फंसाया। तीनों मामलों में पीड़ितों से कुल 2 लाख 73 हजार रुपये से ज्यादा की ठगी की गई है। पुलिस ने मामले दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
रिफंड के नाम पर सहायक सचिव से 1.35 लाख की ठगी
सिहोरा थाना क्षेत्र के दिनारी खम्हरिया निवासी अमित कुमार सेन सहायक सचिव के पद पर पदस्थ हैं। उन्होंने एटीएम से 6 हजार रुपये निकालने की कोशिश की, लेकिन पैसे नहीं निकले। बैंक में शिकायत करने पर उन्हें बताया गया कि रकम 24 घंटे में वापस आ जाएगी।
रुपये वापस नहीं आने पर उन्होंने ग्राहक सेवा से संपर्क किया। इसके बाद एक व्यक्ति ने फोन कर खुद को बैंक कर्मचारी बताया और पैसे वापस करने के नाम पर एक लिंक भेजी। अमित कुमार ने लिंक में मांगी गई जानकारी भरकर भेज दी। इसके बाद उनके खाते से 1 लाख 35 हजार रुपये निकल गए।
तहसीलदार बनकर स्वास्थ्यकर्मी से 96 हजार ठगे
दूसरे मामले में घमापुर निवासी लीला दाहिया से ठगी की गई। वह शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कोतवाली में एएनएम हैं। 13 अगस्त को उनके मोबाइल पर एक व्यक्ति का फोन आया। उसने खुद को नायब तहसीलदार अशोक मीना बताया।
ठग ने एक अन्य व्यक्ति को भी बातचीत में शामिल किया और लीला को बताया कि आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए 5-5 हजार रुपये आने वाले हैं। इसके बाद अलग-अलग समय पर उनसे करीब 96 हजार रुपये अपने खाते में ट्रांसफर करा लिए।
बैंक अधिकारी बनकर किसान के खाते से निकाले 42 हजार
तीसरे मामले में सिहोरा के बोड़ी गांव निवासी राजेन्द्र प्रसाद साहू ठगी का शिकार हुए। उनका भारतीय स्टेट बैंक में खाता था, जो करीब दो साल से बंद था। उन्होंने बैंक जाकर योनों एप दोबारा शुरू कराने की जानकारी ली थी।
इसके बाद एक व्यक्ति ने फोन कर खुद को बैंक अधिकारी बताया और योनों एप चालू कराने के नाम पर प्रक्रिया पूरी कराई। एप तो शुरू नहीं हुआ, लेकिन राजेन्द्र के खाते से अलग-अलग समय पर 42 हजार 160 रुपये निकाल लिए गए।
पुलिस तीनों मामलों की जांच कर रही है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि बैंक कर्मचारी, अधिकारी या किसी सरकारी अधिकारी के नाम पर फोन आने पर बिना जांच के कोई लिंक न खोलें और न ही बैंक से जुड़ी जानकारी किसी के साथ साझा करें।