जबलपुर। यूरिया खाद की कमी के बीच किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। सरकारी वितरण केंद्रों पर 50 किलो यूरिया की बोरी 268 रुपये में मिलती है, जबकि किसानों का आरोप है कि खुले बाजार में यही बोरी निजी दुकानों पर 340 रुपये तक में बेची जा रही है।
किसानों का कहना है कि सहकारी समितियों में खाद उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। दूसरी ओर, निजी दुकानों पर यूरिया का स्टॉक आसानी से उपलब्ध होने से खाद की उपलब्धता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
सोसायटियों में खाद के लिए लंबी कतारें
जानकारी के अनुसार, बड़ी सहकारी समितियों ने करीब 15 टन यूरिया की मांग आरओ डबल लॉक के लिए भेजी है। नियमों के तहत कुल उपलब्ध खाद का 25 प्रतिशत हिस्सा निजी विक्रेताओं को और 75 प्रतिशत सरकारी वितरण केंद्रों के माध्यम से किसानों को वितरित किया जाना है।
इसके बावजूद किसानों का आरोप है कि सरकारी केंद्रों पर खाद पहुंचने के कुछ ही घंटों में स्टॉक खत्म हो जाता है, जबकि निजी दुकानों पर पर्याप्त मात्रा में यूरिया उपलब्ध रहती है।
वितरण व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
किसानों के अनुसार, डबल लॉक केंद्रों पर नकद बिक्री होने के कारण कुछ ही घंटों में पूरा स्टॉक समाप्त हो जाता है। किसान की ऋण पुस्तिका में खाद की बोरी दर्ज कर दी जाती है, जिससे वह दोबारा खाद नहीं ले पाता। वहीं, डबल लॉक केंद्रों से किन लोगों को खाद दी जा रही है, इसका रिकॉर्ड रखने की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
किसानों का आरोप है कि कई जगह केवल नाम दर्ज कर परिचितों को खाद देने से कालाबाजारी की आशंका बनी हुई है। मजबूरी में किसान खुले बाजार से महंगे दाम पर यूरिया खरीदने को मजबूर हैं।
कृषि विभाग ने कहा-रकबे के हिसाब से हो रहा वितरण
वहीं, कृषि अधिकारियों का कहना है कि किसानों को उनके खेत के रकबे के अनुसार खाद का वितरण कराया जा रहा है, ताकि किसी किसान को परेशानी न हो। जिला प्रशासन और कृषि विभाग द्वारा खाद की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था की निगरानी की जा रही है।
हालांकि, किसानों की शिकायतों और निजी दुकानों पर अधिक कीमत में यूरिया बिकने के आरोपों के बाद खाद वितरण व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।