जबलपुर। हैदराबाद से जबलपुर लाए गए रेस के घोड़ों की संदिग्ध मौत और उनकी देखभाल में कथित लापरवाही के मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने घोड़ों की देखरेख करने वाले केयरटेकर को निर्देश दिया है कि वह शपथपत्र के माध्यम से बताए कि कितने घोड़े, किसे और कब बेचे गए। साथ ही बिक्री से जुड़ी पूरी जानकारी अदालत के समक्ष प्रस्तुत करने के आदेश दिए गए हैं।
यह मामला एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की खंडपीठ में सुनवाई के दौरान सामने आया। राज्य शासन की ओर से पेश निरीक्षण रिपोर्ट में बताया गया कि पनागर के रैपुरा स्थित फार्म हाउस का संयुक्त निरीक्षण तीन पशु चिकित्सा विशेषज्ञों और थाना प्रभारी ने किया। निरीक्षण के दौरान वहां रेस के घोड़े नहीं मिले, बल्कि डेयरी संचालित होती पाई गई।
मामले की शुरुआत जबलपुर की पशु प्रेमी सिमरन इस्सर द्वारा दायर जनहित याचिका से हुई थी। याचिका में आरोप लगाया गया कि हैदराबाद से 57 रेस के घोड़े बिना प्रशासन और पशु चिकित्सा विभाग को सूचना दिए रैपुरा स्थित फार्म हाउस में रखे गए थे। उचित भोजन और समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण कई घोड़ों की मौत होने का दावा भी किया गया है।
याचिका में यह भी कहा गया कि निरीक्षण के दौरान पहले थाना प्रभारी ने महाधिवक्ता कार्यालय से निर्देश नहीं मिलने का हवाला दिया था, लेकिन बाद में बिना किसी आधिकारिक आदेश के निरीक्षण कर रिपोर्ट अदालत में पेश कर दी।
बयानों में विरोधाभास पर कोर्ट नाराज
सुनवाई के दौरान केयरटेकर सचिन तिवारी द्वारा पहले दाखिल शपथपत्र में बताया गया था कि 57 घोड़ों में से 19 की मौत हो चुकी है, 22 घोड़े बेचे जा चुके हैं और 3 नए घोड़े खरीदे गए हैं। बाद में उसने अपना बयान बदलते हुए दावा किया कि सभी घोड़े बेच दिए गए हैं। लगातार बदलते बयानों को गंभीरता से लेते हुए हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई और अब घोड़ों की बिक्री का पूरा रिकॉर्ड अदालत में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।