जबलपुर। मौसम में बदलाव के साथ शहर में चिकन पॉक्स यानी छोटी माता के मामले बढ़ने लगे हैं। पिछले करीब 15 दिनों में इसके मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी देखी गई है। सरकारी अस्पतालों के साथ निजी अस्पतालों और क्लीनिकों में भी हर सप्ताह नए मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार इस बार युवाओं में संक्रमण के मामले अधिक सामने आ रहे हैं।
एमडी मेडिसिन डॉ. आदित्य परिहार और जिला अस्पताल के मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. संदीप भगत के मुताबिक, बीमारी की शुरुआत सामान्य मौसमी बुखार जैसे लक्षणों से होती है। इसके बाद शरीर पर छोटे-छोटे दाने निकलने लगते हैं। जांच के दौरान इन मरीजों में वैरिकाला जोस्टर वायरस से होने वाले संक्रमण की पुष्टि हो रही है।
समय पर इलाज जरूरी
डॉक्टरों का कहना है कि शुरुआत में ही चिकित्सकीय सलाह लेने से मरीज को ज्यादा परेशानी से बचाया जा सकता है। सामान्य तौर पर उचित इलाज और देखभाल के बाद मरीज करीब 8 से 10 दिनों में ठीक हो जाता है। संक्रमण को दूसरों तक पहुंचने से रोकने के लिए मरीज को कम से कम एक सप्ताह तक अलग रखना जरूरी है।
मरीज से दूरी और साफ-सफाई का रखें ध्यान
चिकन पॉक्स से पीड़ित व्यक्ति के कपड़े, तौलिया, चादर और बिस्तर अलग रखना चाहिए। हाथों को बार-बार साबुन से धोने के साथ दानों को खुजलाने से बचना जरूरी है। मरीज के कमरे में हवा का पर्याप्त आवागमन होना चाहिए।
बुखार के साथ शरीर पर दाने दिखाई देने पर बिना देरी किए डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। बिना चिकित्सकीय सलाह के कोई दवा नहीं लेनी चाहिए। बच्चों, बुजुर्गों, कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों और गर्भवती महिलाओं को संक्रमित व्यक्ति के संपर्क से दूर रखना जरूरी है।
