जबलपुर। शहर के होटल, रेस्टोरेंट, चौपाटी और डेयरी कारोबार में इस्तेमाल होने वाले पनीर की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि कुछ जगहों पर दूध से तैयार पनीर की जगह कम कीमत वाला एनालॉग पनीर इस्तेमाल किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि यह उत्पाद पाम ऑयल, वनस्पति वसा, सोया पाउडर और स्टार्च जैसे पदार्थों से तैयार किया जाता है। कम लागत में तैयार होने के कारण इसकी खपत बढ़ने की बात सामने आ रही है।
त्योहारी सीजन में पनीर की मांग बढ़ने के साथ इस तरह के उत्पाद की बिक्री को लेकर चिंता और बढ़ जाती है। सावन, जन्माष्टमी और रक्षाबंधन के दौरान होटल, रेस्टोरेंट और मिठाई-डेयरी प्रतिष्ठानों में पनीर की खपत सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ जाती है।
कम कीमत में तैयार होने से बढ़ता कारोबार
डेयरी कारोबार से जुड़े जानकारों के मुताबिक एक किलो शुद्ध पनीर तैयार करने के लिए करीब पांच लीटर दूध की जरूरत पड़ती है। यदि दूध की कीमत करीब 75 रुपये प्रति लीटर मानी जाए तो सिर्फ दूध की लागत लगभग 375 रुपये बैठती है। इसके बाद पनीर तैयार करने में मजदूरी, ईंधन, परिवहन और अन्य खर्च भी जुड़ते हैं।
इसके मुकाबले बाजार में 250 से 280 रुपये किलो के आसपास मिलने वाले कुछ उत्पादों की कीमत काफी कम है। आरोप है कि कुछ कारोबारी ऐसे उत्पाद को खरीदकर ग्राहकों को सामान्य पनीर के नाम पर 380 से 400 रुपये किलो तक बेच रहे हैं। हालांकि किसी उत्पाद के एनालॉग या मानक से बाहर होने की पुष्टि प्रयोगशाला जांच के बाद ही की जा सकती है।
पाम ऑयल और स्टार्च से तैयार होने का दावा
जानकारों का कहना है कि एनालॉग पनीर को असली पनीर जैसा रूप और बनावट देने के लिए अलग-अलग वनस्पति वसा और अन्य सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें पाम ऑयल, वनस्पति फैट, सोया आटा और स्टार्च शामिल होने की बात कही जाती है। इन सामग्रियों के मिश्रण से ऐसा उत्पाद तैयार किया जाता है, जो देखने और इस्तेमाल में पनीर जैसा नजर आ सकता है।
दूध से बने अन्य उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर भी समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में पैक किए गए दही, मक्खन और दूसरे दुग्ध उत्पादों की गुणवत्ता की जांच भी जरूरी मानी जा रही है।
त्योहारों से पहले जांच की जरूरत
पनीर की बढ़ती मांग को देखते हुए खाद्य सुरक्षा विभाग की नियमित निगरानी महत्वपूर्ण हो जाती है। केवल त्योहारों के समय सैंपल लेने के बजाय सालभर होटल, रेस्टोरेंट, डेयरी और खाद्य प्रतिष्ठानों से नमूने लेकर उनकी प्रयोगशाला जांच की जरूरत है। किसी उत्पाद की गुणवत्ता पर संदेह होने की स्थिति में कार्रवाई जांच रिपोर्ट के आधार पर ही की जानी चाहिए।
उपभोक्ताओं के लिए भी पैकेटबंद दुग्ध उत्पाद खरीदते समय लेबल, सामग्री, निर्माता का नाम, लाइसेंस संबंधी जानकारी और अन्य जरूरी विवरण देखना जरूरी है। इससे दूध से बने वास्तविक उत्पाद और दूसरे विकल्पों के बीच अंतर समझने में मदद मिल सकती है।