भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून ने एक बार फिर रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है। बीते दो दिनों से लगातार हो रही बारिश के कारण कई जिलों में नदी-नाले उफान पर हैं, जबकि निचले इलाकों में जलभराव से लोगों की परेशानी बढ़ने लगी है। मौसम विभाग ने अगले 48 घंटों के दौरान प्रदेश के कई जिलों में भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी जारी की है।
प्रदेश में सबसे ज्यादा चिंता उन क्षेत्रों को लेकर है, जहां लगातार तेज बारिश के कारण अचानक बाढ़ की स्थिति बन सकती है। चित्रकूट में मंदाकिनी नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, जबकि मंडला क्षेत्र में नर्मदा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। छतरपुर, पन्ना और मैहर के कई इलाकों में भी भारी बारिश के कारण बाढ़ जैसे हालात बनने लगे हैं।
इन जिलों में अति भारी बारिश का अलर्ट
मौसम विभाग ने शुक्रवार, 4 सितंबर को राजगढ़, नर्मदापुरम, गुना, शिवपुरी, दमोह, सागर, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी जिलों में अति भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। इन क्षेत्रों में कुछ स्थानों पर बहुत तेज बारिश होने की संभावना है।
इसके अलावा भोपाल, विदिशा, रायसेन, सीहोर, बैतूल, उज्जैन, देवास, शाजापुर, आगर, मंदसौर, अशोकनगर, ग्वालियर, दतिया, भिंड, श्योपुर, रीवा, सतना, छिंदवाड़ा और पन्ना जिलों में भी भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।
लगातार बारिश की स्थिति में नदी-नालों के किनारे और निचले इलाकों में जलभराव बढ़ सकता है। लोगों को ऐसे क्षेत्रों से दूर रहने और सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
इन जिलों में अचानक बाढ़ का खतरा
भारी बारिश के साथ प्रदेश के कई जिलों में अचानक जलस्तर बढ़ने और बाढ़ आने का खतरा बना हुआ है। पूर्वी मध्य प्रदेश के दमोह, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, नरसिंहपुर, पन्ना, रीवा, सागर, सतना, सीधी, सिंगरौली, शहडोल, उमरिया, सिवनी, छिंदवाड़ा और टीकमगढ़ जिलों को संवेदनशील माना गया है।
वहीं पश्चिमी मध्य प्रदेश में अशोकनगर, विदिशा, रायसेन, नर्मदापुरम, सीहोर और बैतूल जिलों में भी अचानक बाढ़ की आशंका जताई गई है।
नर्मदा का जलस्तर बढ़ा, बांधों से छोड़ा जा रहा पानी
लगातार बारिश के कारण चित्रकूट में मंदाकिनी नदी उफान पर है। मंडला में नर्मदा नदी का जलस्तर भी तेजी से बढ़ रहा है। दूसरी ओर छतरपुर, पन्ना और मैहर के कुछ इलाकों में बाढ़ जैसे हालात की जानकारी सामने आई है।
जलस्तर को नियंत्रित करने के लिए छतरपुर के कुटनी बांध और जबलपुर के बरगी बांध से भी पानी छोड़ा जा रहा है। ऐसे में नदी के निचले क्षेत्रों में जलस्तर बढ़ने की संभावना को देखते हुए प्रशासन को विशेष निगरानी रखने की जरूरत है।
निम्न दबाव क्षेत्र के कारण बढ़ी बारिश
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार पूर्वोत्तर मध्य प्रदेश और आसपास बने निम्न दबाव क्षेत्र के कारण प्रदेश में बारिश की गतिविधियां तेज हुई हैं। इसके प्रभाव से 3 से 5 सितंबर के बीच प्रदेश के कई हिस्सों में भारी से अति भारी बारिश होने की संभावना बनी हुई है।
पूर्वी मध्य प्रदेश के कुछ स्थानों पर अत्यधिक भारी बारिश भी हो सकती है। अगले 24 से 48 घंटे प्रदेश के लिए अहम माने जा रहे हैं। इस दौरान तेज बारिश के साथ गरज-चमक, तेज हवाएं और स्थानीय स्तर पर जलभराव की स्थिति बन सकती है। प्रशासन और लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।