जबलपुर। पनागर वन परिक्षेत्र के द्वारिका परिसर में 5 सितंबर को दिखाई दिए 4 से 5 फीट लंबे मगरमच्छ को वन विभाग की टीम ने सात दिनों की तलाश के बाद 11 सितंबर को पकड़ लिया। मगरमच्छ के रेस्क्यू के बाद सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया, जिसमें अतुल कुशवाहा और बिल्लू चौरसिया नाम के युवक मगरमच्छ को सड़क पर स्कूटर के आगे रखकर ले जाते दिखाई दे रहे हैं।
वीडियो संदीप सोंधिया की प्रोफाइल से प्रसारित होने की बात सामने आई है। वीडियो सामने आने के बाद वन्यजीव को इस तरह ले जाने के तरीके पर सवाल उठ रहे हैं। मामले की जानकारी मिलने पर जबलपुर डीएफओ पुनीत सोनकर ने इसे गंभीरता से लेते हुए जांच और कार्रवाई की बात कही है।
स्कूटर पर रखकर ले जाते दिखे मगरमच्छ
सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में मगरमच्छ को किसी सुरक्षित वाहन या बंद पिंजरे के बजाय स्कूटर के आगे रखा हुआ दिखाई दे रहा है। सड़क पर इस तरह मगरमच्छ को ले जाने से राहगीरों के साथ वन्यजीव की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
वन विभाग ने जांच की बात कही
मगरमच्छ को वन विभाग द्वारा रेस्क्यू किए जाने के बाद उसके परिवहन से जुड़ा यह वीडियो सामने आया है। विभाग अब यह पता लगाने में जुटा है कि मगरमच्छ को स्कूटर से किसके निर्देश पर और किन परिस्थितियों में ले जाया गया।
डीएफओ पुनीत सोनकर ने मामले में आधिकारिक जांच कर जिम्मेदारी तय करने और नियमों के अनुसार कार्रवाई किए जाने की बात कही है।
रेस्क्यू के बाद परिवहन के तरीके पर उठे सवाल
मगरमच्छ को रेस्क्यू करने के दौरान वन्यजीव की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में खुले में दोपहिया वाहन पर मगरमच्छ को ले जाने का वीडियो सामने आने के बाद विभागीय व्यवस्था और सुरक्षा मानकों को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
अब जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि मगरमच्छ को इस तरह ले जाने के पीछे क्या परिस्थितियां थीं और इसमें कौन लोग जिम्मेदार थे।