उज्जैन। नाग पंचमी का पर्व भगवान शिव और नाग देवता की पूजा के लिए विशेष माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस दिन नाग देवता और भगवान शिव की पूजा करने से राहु-केतु से जुड़े दोष और कालसर्प दोष के प्रभाव को कम करने की मान्यता है। हालांकि, ये धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताएं हैं, इनका वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।
भगवान शिव का करें पूजन
नाग पंचमी के दिन सुबह स्नान के बाद भगवान शिव का जलाभिषेक करें। शिवलिंग पर जल और बेलपत्र चढ़ाकर भगवान शिव का ध्यान करें। सावन में नाग पंचमी सोमवार के दिन पड़ने से शिव पूजा का विशेष महत्व माना जा रहा है।
नाग देवता की करें पूजा
नाग देवता की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाकर फूल और अक्षत अर्पित करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार नाग देवता से परिवार की सुख-शांति और सुरक्षा की प्रार्थना करनी चाहिए।
कालसर्प दोष के लिए ये उपाय
ज्योतिषीय मान्यताओं में नाग पंचमी को कालसर्प दोष से जुड़े उपायों के लिए विशेष दिन माना जाता है। इस दिन महामृत्युंजय मंत्र का जाप, शिव पूजा और नाग देवता की आराधना करने की सलाह दी जाती है। कुछ परंपराओं में चांदी के नाग-नागिन के जोड़े का पूजन कर उसे शिव मंदिर में अर्पित करने का भी उल्लेख मिलता है।
नागों को नुकसान न पहुंचाएं
नाग पंचमी का सबसे जरूरी संदेश सांपों और दूसरे जीवों की रक्षा भी है। सांपों को पकड़कर या उन्हें परेशान करके पूजा करने के बजाय नाग देवता की प्रतिमा या तस्वीर की पूजा करना बेहतर है। जरूरतमंदों की मदद और जीव-जंतुओं के प्रति दया को भी इस पर्व की भावना से जोड़ा जाता है।
ध्यान रखें: अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में कालसर्प दोष है या नहीं, यह केवल जन्मकुंडली देखकर ज्योतिषीय गणना का विषय है। किसी भी महंगे अनुष्ठान या रत्न आदि पर पैसा खर्च करने से पहले योग्य विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित है।