जबलपुर: नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ वाइल्डलाइफ में पिछले डेढ़ महीने से इलाज करा रहे तेंदुए की अंतिम स्वास्थ्य जांच की तैयारी शुरू हो गई है। तेंदुए में पहले कैनाइन डिस्टेंपर वायरस की पुष्टि हुई थी, लेकिन इलाज और विशेष देखभाल के बाद उसकी हालत में काफी सुधार आया है।
वाइल्डलाइफ विशेषज्ञों की टीम अब यह सुनिश्चित करना चाहती है कि तेंदुआ पूरी तरह स्वस्थ हो चुका है या नहीं। इसके लिए उसे बेहोश कर ब्लड सैंपल और अन्य जरूरी नमूने लिए जाएंगे। जांच के लिए वन विभाग से अनुमति मांगी गई है और मंजूरी मिलते ही प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
डॉक्टरों का कहना है कि केवल बाहरी रूप से स्वस्थ दिखना पर्याप्त नहीं है। लैब जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि तेंदुए के शरीर में वायरस पूरी तरह खत्म हुआ है या नहीं।
कैनाइन डिस्टेंपर एक खतरनाक और संक्रामक बीमारी है, जो वन्यजीवों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। इसी वजह से पिछले कई सप्ताह से विशेषज्ञों की टीम तेंदुए की लगातार निगरानी कर रही थी। बेहतर इलाज, दवाओं और विशेष आहार के कारण उसकी सेहत में सुधार देखने को मिला है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने जांच संबंधी सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। अब वन विभाग की मंजूरी का इंतजार है। अनुमति मिलते ही डॉक्टरों की टीम तेंदुए का अंतिम मेडिकल परीक्षण करेगी, जिसके बाद उसके भविष्य को लेकर फैसला लिया जाएगा।