धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पिछले एक माह से चल रहा अधिकमास 15 जून को समाप्त हो जाएगा। इसके साथ ही विवाह, गृह प्रवेश, सगाई और अन्य मांगलिक कार्यों पर लगी रोक भी हट जाएगी। लंबे समय से शुभ मुहूर्त का इंतजार कर रहे परिवार अब तैयारियों में जुट गए हैं। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार 19 जून से विवाह सहित विभिन्न शुभ कार्यों के लिए अनुकूल समय शुरू हो जाएगा।
इस वर्ष विवाह सीजन सामान्य वर्षों की तुलना में छोटा रहने वाला है। अधिकमास समाप्त होने के बाद लोगों को केवल सीमित अवधि ही मिलेगी, क्योंकि 25 जुलाई से चातुर्मास प्रारंभ हो जाएगा। ऐसे में 19 जून से 25 जुलाई के बीच बड़ी संख्या में विवाह और अन्य मांगलिक कार्यक्रम आयोजित होने की संभावना है।
शहरों में विवाह सीजन को लेकर उत्साह बढ़ने लगा है। मैरिज गार्डन, होटल, बैंक्वेट हॉल, डेकोरेशन और कैटरिंग व्यवसाय से जुड़े लोगों के पास लगातार पूछताछ और बुकिंग के लिए संपर्क किए जा रहे हैं। कई लोकप्रिय विवाह स्थलों की अग्रिम बुकिंग भी शुरू हो चुकी है। विवाह आयोजकों का मानना है कि सीमित समय के कारण इस बार कई तारीखों पर बड़ी संख्या में शादियां एक साथ हो सकती हैं।
ज्योतिष विशेषज्ञों के मुताबिक 15 जून को अधिकमास और सोमवती अमावस्या का समापन होगा, जबकि 16 जून से शुद्ध ज्येष्ठ मास प्रारंभ माना जाएगा। इसके बाद 19 जून से विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, नामकरण संस्कार, मुंडन और नए व्यवसाय की शुरुआत जैसे शुभ कार्यों के लिए मुहूर्त उपलब्ध हो जाएंगे।
धार्मिक मान्यता के अनुसार अधिकमास भगवान विष्णु की आराधना, दान-पुण्य और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए समर्पित माना जाता है। इस अवधि में विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों से परहेज किया जाता है। इसलिए अधिकमास समाप्त होने के बाद शुभ कार्यों का सिलसिला फिर से शुरू हो जाता है।
हालांकि यह अवधि ज्यादा लंबी नहीं रहेगी। 25 जुलाई को देवशयनी एकादशी के साथ चातुर्मास प्रारंभ हो जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन से भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं और अगले चार महीनों तक विवाह सहित कई मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। इसी कारण 19 जून से 25 जुलाई के बीच के मुहूर्तों को विशेष महत्व दिया जा रहा है।
धार्मिक जानकारों का कहना है कि इस बार कम दिनों में अधिक संख्या में कार्यक्रम होने की संभावना है, इसलिए विवाह और अन्य आयोजनों की तैयारी कर रहे परिवारों को समय रहते स्थल, कैटरिंग और अन्य व्यवस्थाओं की बुकिंग कर लेनी चाहिए।
प्रमुख तिथियां
15 जून – अधिकमास समाप्त, सोमवती अमावस्या
16 जून – शुद्ध ज्येष्ठ मास प्रारंभ
17 जून – रमा एकादशी व्रत
18 जून – चंपा द्वादशी
19 जून – विवाह एवं मांगलिक कार्यों के शुभ मुहूर्त प्रारंभ
23 जून – सूर्य रोहिणी नक्षत्र से बाहर
25 जुलाई – देवशयनी एकादशी, चातुर्मास प्रारंभ
27 जुलाई – प्रदोष व्रत
29 जुलाई – पूर्णिमा एवं ज्येष्ठ मास का समापन
अधिकमास समाप्त होने के साथ ही एक बार फिर विवाह समारोहों की रौनक लौटने वाली है और आने वाले कुछ सप्ताह मांगलिक आयोजनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।