जबलपुर - शहीद स्मारक मैदान में लगे पुस्तक मेले को लेकर पाटन विधायक अजय विश्नोई ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर आरोप लगाया कि प्रशासनिक बदलाव के बाद मेले की व्यवस्था और उद्देश्य बदल गए हैं।
विधायक ने बताया कि साल 2024 में तत्कालीन कलेक्टर दीपक सक्सेना ने निजी स्कूलों और पुस्तक विक्रेताओं के गठजोड़ को रोकने के लिए इस मेले की शुरुआत की थी, ताकि छात्रों को सस्ती किताबें मिल सकें। लेकिन अब स्थिति बदल गई है।
अजय विश्नोई के अनुसार, इस बार मेले में किताबों के सेट महंगे दामों पर बेचे जा रहे हैं, जबकि सिर्फ कॉपियों पर ही 60% तक छूट दी जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रशासन की दूरी के कारण विक्रेताओं को मनमानी करने का मौका मिल रहा है।
उन्होंने अभिभावकों को सलाह दी कि कॉपी या किताब खरीदते समय उसके छपे हुए दाम (MRP) को जरूर देखें, क्योंकि असली कीमत अक्सर उससे कम होती है।
वहीं जिला शिक्षा अधिकारी घनश्याम सोनी का कहना है कि मेले में एनसीईआरटी की किताबें उपलब्ध हैं और छूट का फैसला विक्रेता खुद तय करते हैं। प्रतिस्पर्धा के कारण ही दाम कम-ज्यादा होते हैं।
यह मामला अब सिर्फ एक मेले तक सीमित नहीं है, बल्कि उपभोक्ताओं के हित और प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल खड़े कर रहा है।