जबलपुर - स्वास्थ्य विभाग से जुड़ा एक और बड़ा घोटाला सामने आया है। 93 लाख के फर्जी बिल भुगतान मामले के बाद अब मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिकों में उपकरण खरीदी और रंगाई-पुताई के नाम पर लाखों रुपये के फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है।
जिले के 58 संजीवनी क्लीनिकों पर करीब 43 लाख रुपये खर्च दिखाए गए हैं। कलेक्टर राघवेंद्र सिंह के निर्देश पर गठित टीम क्लीनिकों का भौतिक सत्यापन कर रही है।
जांच में क्या मिला
जांच के दौरान सामने आया कि कई क्लीनिकों में रंगाई-पुताई नहीं हुई, लेकिन बिल निकाल लिया गया। कहीं चूना पुतवाकर डिस्टेंपर का बिल लगाया गया। कंप्यूटर और अन्य सामग्री की खरीदी के भी दस्तावेज तो मिले, लेकिन सामान मौके पर नहीं मिला।
दस्तावेज और हकीकत में अंतर
रिकॉर्ड में जिन कंप्यूटर और प्रिंटर की खरीदी दिखाई गई, वे क्लीनिकों में मौजूद नहीं मिले। इससे गड़बड़ी की आशंका और बढ़ गई है।
7 अधिकारी संदेह के घेरे में
अब तक की जांच में 7 अधिकारी-कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। रिपोर्ट कलेक्टर को सौंपने के बाद एफआईआर दर्ज हो सकती है।
नए सीएमएचओ की नियुक्ति
निलंबित डॉ. संजय मिश्रा की जगह डॉ. नवीन कोठारी को सीएमएचओ का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।
मुख्य आरोप
बिना काम किए लाखों का भुगतान
बिना अनुमति करोड़ों के ऑर्डर जारी
सामग्री खरीदी दिखाकर भुगतान, लेकिन सामान गायब
फर्जी बिल और नियमों की अनदेखी
फिलहाल प्रशासन जांच में जुटा है और जल्द सख्त कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।