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दिव्यांग बच्चों को स्कूल से निकालने पर हाईकोर्ट सख्त, भेदभाव पर लगाई रोक




जबलपुर। दिव्यांग बच्चों को स्कूल से बाहर किए जाने के मामले में हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने साफ कहा है कि किसी भी बच्चे के साथ भेदभाव करना गलत है और इसे किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

यह मामला जबलपुर के कुछ निजी स्कूलों से जुड़ा है, जहां से शिकायत आई थी कि दिव्यांग (स्पेशल) बच्चों को पढ़ाई से बाहर किया जा रहा है। इस पर जनहित याचिका दायर की गई, जिसके बाद हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई की।

20 अप्रैल को हुई सुनवाई में चीफ जस्टिस की बेंच ने तुरंत प्रभाव से दिव्यांग बच्चों को स्कूल से निकालने पर रोक लगा दी। कोर्ट ने कहा कि ऐसे बच्चों को शिक्षा से वंचित नहीं किया जा सकता। साथ ही जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) को निर्देश दिए गए हैं कि जिले के सभी स्कूलों में पढ़ रहे दिव्यांग बच्चों की पूरी जानकारी इकट्ठा कर रिपोर्ट पेश करें।

याचिका में बताया गया कि जबलपुर में कई सरकारी और निजी स्कूलों में दिव्यांग बच्चे पढ़ रहे हैं, लेकिन उनके लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। कई स्कूलों में विशेष शिक्षक (स्पेशल टीचर) भी नहीं हैं, जबकि कानून के अनुसार यह अनिवार्य है।

दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 और शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के तहत हर बच्चे को बराबरी का अधिकार मिला है। इसके बावजूद यदि किसी बच्चे को उसकी स्थिति के कारण स्कूल से बाहर किया जाता है, तो यह उसके अधिकारों का उल्लंघन माना जाएगा।

कोर्ट ने इस पूरे मामले को गंभीर मानते हुए साफ संकेत दिए हैं कि नियमों का पालन हर हाल में करना होगा। अब इस मामले की अगली सुनवाई 29 अप्रैल को होगी।

इस फैसले के बाद उम्मीद है कि दिव्यांग बच्चों को स्कूलों में बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और उन्हें बिना किसी भेदभाव के शिक्षा का अधिकार मिल सकेगा।

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