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22 अप्रैल को स्कंद षष्ठी, भगवान कार्तिकेय की पूजा का विशेष महत्व

 


जबलपुर। देवाधिदेव महादेव और माता पार्वती के पुत्र भगवान कार्तिकेय को समर्पित स्कंद षष्ठी का पर्व 22 अप्रैल (बुधवार) को मनाया जाएगा। यह दिन धार्मिक दृष्टि से बहुत खास माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु व्रत रखते हैं और भगवान स्कंद की विधि-विधान से पूजा कर सुख-समृद्धि और सफलता की कामना करते हैं।

पंचांग के अनुसार, बैशाख माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि 22 अप्रैल को पड़ रही है। इस दिन सूर्योदय सुबह 5 बजकर 49 मिनट पर होगा और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 51 मिनट पर होगा। षष्ठी तिथि रात 10 बजकर 49 मिनट तक रहेगी, इसके बाद सप्तमी तिथि शुरू हो जाएगी।

नक्षत्र की बात करें तो आर्द्रा नक्षत्र रात 10 बजकर 13 मिनट तक रहेगा, इसके बाद पुनर्वसु नक्षत्र प्रारंभ होगा। इस दिन रवि योग सुबह 5:49 बजे से रात 10:13 बजे तक रहेगा, जो शुभ कार्यों के लिए अच्छा माना जाता है।

हालांकि इस दिन अभिजीत मुहूर्त नहीं है, लेकिन विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 30 मिनट से 3 बजकर 22 मिनट तक रहेगा, जो किसी भी कार्य की सफलता के लिए शुभ माना जाता है। इसके अलावा अमृत काल दोपहर 12 बजकर 57 मिनट से 2 बजकर 26 मिनट तक रहेगा, जो विशेष रूप से लाभदायक समय माना जाता है।

पूजा-पाठ के लिए ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 21 मिनट से 5 बजकर 5 मिनट तक रहेगा। वहीं शाम का गोधूलि मुहूर्त 6 बजकर 50 मिनट से 7 बजकर 12 मिनट तक रहेगा, जिसमें पूजा करना शुभ माना जाता है।

अशुभ समय की बात करें तो राहुकाल दोपहर 12 बजकर 20 मिनट से 1 बजकर 58 मिनट तक रहेगा। यमगंड काल सुबह 7 बजकर 27 मिनट से 9 बजकर 4 मिनट तक और गुलिक काल सुबह 10 बजकर 42 मिनट से दोपहर 12 बजकर 20 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा दुर्मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 54 मिनट से 12 बजकर 46 मिनट तक रहेगा, जबकि वर्ज्य काल सुबह 7 बजकर 45 मिनट से 9 बजकर 14 मिनट तक रहेगा।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान कार्तिकेय की पूजा करने से साहस, बुद्धि और विजय की प्राप्ति होती है। भक्त व्रत रखकर दिनभर पूजा-पाठ करते हैं और शाम को भगवान की आरती कर प्रसाद ग्रहण करते हैं।

श्रद्धालुओं को सलाह दी जाती है कि वे शुभ कार्य करते समय सही मुहूर्त का ध्यान रखें और राहुकाल जैसे अशुभ समय से बचें, ताकि उन्हें पूजा का पूरा फल मिल सके।

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