जबलपुर। मंडला जिले स्थित कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघों की लगातार हो रही मौतों ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। महज एक महीने के भीतर तीसरे बाघ की मौत सामने आई है, जबकि तीन दिनों में दूसरे शावक का शव मिलने से हड़कंप मच गया है।
सड़ी-गली हालत में मिला शावक
ताजा मामला सरही वन परिक्षेत्र के सरहीनकान बीट का है, जहां 23 अप्रैल को ईंटावारे नाला क्षेत्र में एक बाघ शाव मृत मिला। सूचना मिलते ही अधिकारियों ने क्षेत्र को घेरकर सर्चिंग शुरू की। डॉग स्क्वॉड और हाथियों की मदद से जांच की गई। पोस्टमार्टम में शव सड़ी-गली हालत में मिला, जिससे मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो पाया।
अप्रैल में मौतों की बढ़ती कड़ी
अप्रैल महीने में अब तक एक मादा बाघ और दो शावकों सहित तीन बाघों की मौत हो चुकी है। 21 अप्रैल को मिले एक शावक की मौत को प्राकृतिक बताया गया था, जबकि 23 अप्रैल को मिले दूसरे शावक की मौत अब भी रहस्य बनी हुई है। इससे पहले कन्हारी बीट में एक मादा बाघ की मौत आपसी संघर्ष के कारण बताई गई थी।
विशेषज्ञों की टीम कर रही जांच
जांच में वन्यजीव फोरेंसिक विशेषज्ञ, पेंच टाइगर रिजर्व के चिकित्सक और स्थानीय पशु चिकित्सकों की टीम शामिल रही। पूरी कार्रवाई वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में हुई।
लगातार हो रही इन घटनाओं ने देश के प्रसिद्ध कान्हा टाइगर रिजर्व की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वन विभाग मामले की गहराई से जांच में जुटा है।