जबलपुर। छिंदवाड़ा में जहरीले कफ सिरप से हुई बच्चों की मौत के बाद अब जबलपुर में भी स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है। बच्चों को दी जाने वाली पैरासिटामोल पीडियाट्रिक ओरल सस्पेंशन (125 एमजी/5 एमएल) का एक बैच सरकारी जांच में अमानक पाया गया है। इसके उपयोग पर तत्काल रोक लगा दी गई है।
हजारों बच्चों को दी गई दवा
यह सिरप शासकीय रानी दुर्गावती अस्पताल समेत अन्य सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में 2024 से वितरित की जा रही थी। अब तक करीब 14,900 बच्चों को यह दवा पिलाई जा चुकी है और 10 हजार से अधिक शीशियों का उपयोग हो चुका है। नवजात से लेकर 12 साल तक के बच्चों को बुखार में यह सिरप दी जाती थी।
रिपोर्ट के बाद भी देरी
भोपाल की ड्रग टेस्टिंग लेबोरेटरी ने मार्च 2026 में जांच के दौरान इस बैच को अमानक पाया था, लेकिन इसके उपयोग पर रोक लगाने में देरी हुई। इस कारण विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
अधिकारियों पर उठे सवाल
इस दौरान तत्कालीन सीएमएचओ डॉ. संजय मिश्रा के पास जिले का प्रभार था, जिन्हें पहले ही वित्तीय अनियमितता के मामले में निलंबित किया जा चुका है। वर्तमान प्रभारी सीएमएचओ डॉ. नवीन कोठारी ने आदेश जारी कर दवा के उपयोग पर तत्काल रोक लगाते हुए स्टॉक वापस मंगाने के निर्देश दिए हैं।
यह दवा सरकारी एजेंसी के माध्यम से सप्लाई की गई थी। मामले ने स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर कर दिया है।