akhbaar update

नाम की भिन्नता बनी बाधा, कोर्ट के फैसले से रेलवे कर्मी की पत्नी को मिली राहत




जबलपुर। पश्चिम मध्य रेलवे के एक दिवंगत कर्मचारी की पत्नी को अदालत से बड़ी राहत मिली है। दस्तावेजों में नाम अलग-अलग होने के कारण रुकी हुई भुगतान राशि अब जारी करने का रास्ता साफ हो गया है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि विवाह के बाद सरनेम बदलना सामान्य बात है और ऐसे में अलग-अलग नामों को एक ही व्यक्ति माना जाएगा।

सेवा लाभ के लिए करना पड़ा संघर्ष

मामले के अनुसार, पश्चिम मध्य रेलवे के जबलपुर मंडल में टेक्नीशियन-1 पद पर कार्यरत कर्मचारी का 15 जुलाई 2024 को निधन हो गया था। इसके बाद उनकी पत्नी ने अंतिम भुगतान और अन्य सेवा लाभों के लिए आवेदन किया, लेकिन दस्तावेजों में नाम की भिन्नता के चलते प्रक्रिया अटक गई। रेलवे प्रशासन ने इसी आधार पर भुगतान रोक दिया और अदालत से घोषणा लाने को कहा।

साक्ष्यों से साबित हुआ दावा

सुनवाई के दौरान वादिनी के अधिवक्ता शिवम गुप्ता ने बताया कि नाम में अंतर केवल विवाह के बाद सरनेम बदलने के कारण है। इस दावे के समर्थन में नोटराइज्ड शपथ पत्र और अन्य साक्ष्य अदालत में प्रस्तुत किए गए। रेलवे की ओर से नामों में अंतर और पर्याप्त विवाह दस्तावेज न होने का तर्क दिया गया।

कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला

सभी पक्षों को सुनने के बाद तृतीय व्यवहार न्यायाधीश, कनिष्ठ खंड, जबलपुर रिशा अहमद कुरैशी ने 18 मार्च 2026 को फैसला सुनाया। अदालत ने वादिनी के सभी नामों को एक ही व्यक्ति मानते हुए वैधानिक मान्यता दी और रेलवे को निर्देश दिया कि लंबित भुगतान जल्द पूरा किया जाए। साथ ही, पूरे मुकदमे का खर्च भी रेलवे प्रशासन को वहन करने का आदेश दिया गया।

Post a Comment

Previous Post Next Post
akhbaar update
akhbaar update