जबलपुर में देशभर के श्रम संगठनों के आह्वान पर नई श्रम संहिताओं के विरोध में काला दिवस मनाया गया। इस दौरान मध्यप्रदेश विद्युत कर्मचारी संघ फेडरेशन के पदाधिकारियों और कर्मचारियों ने एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन किया।
फेडरेशन के महामंत्री राकेश डीपी पाठक ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा लागू की गई चार नई श्रम संहिताएं श्रमिकों के हित में नहीं हैं। उनका आरोप है कि इन कानूनों से श्रमिकों के अधिकार कमजोर होंगे और उन्हें शोषण जैसी स्थिति का सामना करना पड़ सकता है।
उन्होंने बताया कि नए नियमों में यूनियन बनाना और उसका पंजीकरण करना कठिन बनाया गया है, जबकि उसे समाप्त करना आसान कर दिया गया है। साथ ही कार्य समय को लचीला बनाकर नियोक्ताओं को अधिक अधिकार दिए गए हैं, जिससे कर्मचारियों पर काम का दबाव बढ़ सकता है।
फेडरेशन ने यह भी आरोप लगाया कि फिक्स्ड टर्म रोजगार को बढ़ावा दिया जा रहा है और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े कानूनों को कमजोर किया जा रहा है। इससे श्रमिकों की सुरक्षा और अधिकारों पर असर पड़ सकता है।
इसके अलावा कर्मचारियों ने पेंशनर्स को महंगाई राहत और परिवार पेंशन देने की मांग भी उठाई। राज्य बंटवारे से जुड़ी धारा 49 को समाप्त करने की मांग करते हुए कहा गया कि इससे कई पेंशनर्स परेशान हो रहे हैं।
प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में कर्मचारी मौजूद रहे और सभी ने एक स्वर में इन श्रम संहिताओं का विरोध करते हुए सरकार से इन्हें वापस लेने की मांग की।