सतना - रैगांव सीट से विधायक व राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी से जुड़े फर्जी जाति प्रमाण पत्र मामले में कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि पूरे मामले की जांच कर 60 दिनों के भीतर रिपोर्ट पेश की जाए, जिसे उच्च स्तरीय समिति परखेगी।
शुक्रवार को हुई सुनवाई में डबल बेंच—न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल और न्यायमूर्ति अविनेद्र कुमार सिंह—ने सरकार से पूछा कि करीब एक साल से जांच लंबित क्यों है और इसे दबाने की कोशिश क्यों की गई। अदालत ने साफ कहा कि जांच समयसीमा में पूरी कर 20 जून तक रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।
यह याचिका कांग्रेस नेता प्रदीप अहिरवार द्वारा दायर की गई है। याचिका में आरोप है कि प्रतिमा बागरी ने कथित रूप से गलत तरीके से अनुसूचित जाति (SC) का प्रमाण पत्र बनवाकर सतना की रैगांव आरक्षित सीट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की।
याचिका में 1961-1971 की जनगणना, 2003 की राज्य स्तरीय जाति छानबीन समिति और 2007 के केंद्र सरकार के राजपत्र का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि ‘बागरी’ जाति को संबंधित क्षेत्रों में SC श्रेणी में शामिल नहीं किया गया था।
याचिकाकर्ता ने कोर्ट से निष्पक्ष जांच और आरोप सही पाए जाने पर संवैधानिक कार्रवाई की मांग की है। गौरतलब है कि प्रतिमा बागरी ने 2023 विधानसभा चुनाव में जीत के बाद राज्य मंत्री पद संभाला है।