उज्जैन। हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र में सूर्य की स्थिति को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, खासकर मांगलिक कार्यों के लिए। जब सूर्य देव बृहस्पति की राशियों—मीन या धनु—में होते हैं, तब उस अवधि को खरमास कहा जाता है। इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन जैसे शुभ कार्यों पर रोक लग जाती है। वर्तमान में सूर्य मीन राशि में विराजमान हैं, जिसके कारण पिछले कुछ समय से सभी मांगलिक कार्य स्थगित थे।
अब यह प्रतीक्षा समाप्त होने जा रही है। इस वर्ष 14 अप्रैल को खरमास खत्म होगा। इसी दिन सूर्य मीन राशि से निकलकर मेष राशि में प्रवेश करेंगे, जिसे मेष संक्रांति कहा जाता है। सूर्य के इस गोचर के साथ ही शुभ कार्यों पर लगा प्रतिबंध हट जाएगा और 15 अप्रैल से एक बार फिर शादी-ब्याह सहित अन्य मांगलिक कार्यक्रम शुरू हो जाएंगे।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, विवाह के लिए सूर्य और गुरु दोनों का मजबूत होना आवश्यक माना जाता है। मेष राशि में सूर्य का प्रवेश उनकी ऊर्जा को और प्रभावशाली बनाता है, जिससे वैवाहिक जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आने की मान्यता है। यही कारण है कि खरमास समाप्त होते ही बड़ी संख्या में लोग विवाह और अन्य शुभ कार्यों की योजना बनाते हैं।
अप्रैल 2026 में विवाह के प्रमुख मुहूर्त
खरमास खत्म होने के बाद अप्रैल माह में कई शुभ तिथियां उपलब्ध हैं। इनमें 15, 20, 21, 25, 26, 27, 28 और 29 अप्रैल को विवाह के लिए विशेष रूप से उत्तम माना गया है। इन दिनों में विवाह करने से दांपत्य जीवन में स्थिरता और खुशहाली आने की मान्यता है।
अन्य मांगलिक कार्य भी होंगे शुरू
विवाह के अलावा मुंडन, नामकरण, यज्ञोपवीत जैसे संस्कार भी 15 अप्रैल से फिर से किए जा सकेंगे। धार्मिक और पारिवारिक आयोजनों में भी तेजी आएगी और मंदिरों व विवाह स्थलों पर रौनक लौटेगी।
गृह प्रवेश के लिए सिर्फ एक श्रेष्ठ दिन
हालांकि अप्रैल महीने में गृह प्रवेश के लिए ज्यादा विकल्प नहीं हैं। ज्योतिष के अनुसार 21 अप्रैल 2026 को ही इस कार्य के लिए सबसे शुभ और फलदायी मुहूर्त माना गया है। इसलिए जो लोग नए घर में प्रवेश की योजना बना रहे हैं, उनके लिए यह तारीख बेहद महत्वपूर्ण है।
खरमास समाप्त होने के साथ ही बाजारों, शादी समारोहों और धार्मिक आयोजनों में फिर से रौनक लौटने की उम्मीद है। पंडितों और ज्योतिषियों का मानना है कि शुभ मुहूर्त का पालन केवल परंपरा नहीं, बल्कि सुखी और समृद्ध जीवन की शुरुआत का प्रतीक होता है।