जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने रेलवे के एक बुकिंग क्लर्क को लेकर 25 साल पुराने मामले में अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने कर्मचारी की बर्खास्तगी को गलत बताते हुए उसे राहत दी है। मामला सिर्फ 10 रुपये के लेनदेन में गड़बड़ी के आरोप से जुड़ा था, लेकिन इसके चलते कर्मचारी को नौकरी से निकाल दिया गया था।
पूरा मामला साल 2002 का है, जब श्रीधाम रेलवे स्टेशन पर तैनात बुकिंग क्लर्क नारायण नायर के खिलाफ शिकायत हुई थी। एक यात्री ने आरोप लगाया था कि उसे टिकट के पैसे वापस करते समय 10 रुपये कम दिए गए। जांच के दौरान काउंटर से 450 रुपये ज्यादा मिलने पर विजिलेंस टीम ने कार्रवाई की।
कर्मचारी ने सफाई दी थी कि पैसे निजी जरूरत के थे और भीड़ के कारण गलती हो सकती है, लेकिन विभाग ने उनकी बात नहीं मानी और पहले निलंबित कर बाद में नौकरी से हटा दिया। इसके खिलाफ नायर ने कानूनी लड़ाई शुरू की और केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) पहुंचे, जहां से उन्हें राहत मिली।
रेलवे ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिस पर लंबी सुनवाई के बाद अब फैसला आया है। कोर्ट ने कहा कि जांच प्रक्रिया में गंभीर खामियां थीं और कर्मचारी को सही मौका नहीं दिया गया।
अदालत ने रेलवे की याचिका खारिज करते हुए कर्मचारी की बहाली का रास्ता साफ कर दिया। इस फैसले से उन्हें पिछले कई वर्षों के वेतन और अन्य लाभ मिलने की उम्मीद भी बढ़ गई है।