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युद्ध का असर बाजार पर, सूखे मेवे और आयातित फलों के दाम बढ़े



जबलपुर। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे युद्ध और उससे प्रभावित सप्लाई चेन का असर अब देश के खाद्य बाजारों में भी दिखाई देने लगा है। आयातित फलों और सूखे मेवों की आवक कम होने से उनकी कीमतों में तेजी आ गई है। कई प्रमुख बाजारों में दाम 5 से 20 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं।

व्यापारियों के अनुसार ईरान और इजरायल के बीच चल रहे संघर्ष के कारण मध्य एशिया और अन्य देशों से आने वाले बादाम, अखरोट, किशमिश और सूखे अंजीर की आपूर्ति प्रभावित हुई है। परिवहन लागत बढ़ने और माल की कमी के कारण बाजार में इनके दाम तेजी से बढ़ रहे हैं।

सेब और अन्य आयातित फलों की कीमतें भी बढ़ गई हैं, जिससे खुदरा बाजार में उपभोक्ताओं को महंगाई का सामना करना पड़ रहा है। वहीं दूसरी ओर घरेलू मसालों की कीमतों में गिरावट देखी जा रही है। बेहतर उत्पादन और निर्यात मांग में कमी के कारण हल्दी, धनिया और लाल मिर्च जैसे मसालों के दाम कुछ कम हुए हैं।

थोक व्यापारी पुनीत सेठी के अनुसार इस समय बाजार में मांग सामान्य से कम है। ईद और नवरात्र के आसपास मांग बढ़ने की उम्मीद रहती है, लेकिन मौजूदा हालात में बाजार प्रभावित हुआ है। उन्होंने कहा कि यदि युद्ध लंबे समय तक चलता है तो कीमतें और बढ़ सकती हैं, क्योंकि पुराना स्टॉक भी खत्म होने की स्थिति में है।

आयातित फलों की कीमतों में तेजी

न्यू थोक फल व्यापारी संघ के अध्यक्ष अशरफ ने बताया कि पिछले करीब 15 दिनों से बाजार में नया आयातित माल नहीं पहुंचा है। इसके कारण वाशिंगटन से आने वाले सेब और थाईलैंड के अंगूर महंगे हो गए हैं। उन्होंने कहा कि यदि जल्द आपूर्ति सामान्य नहीं हुई तो नवरात्र के दौरान आम लोगों के लिए फल खरीदना महंगा पड़ सकता है।

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