जबलपुर। जबलपुर की एक युवती ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में एक सनसनीखेज आरोप लगाया है, जिसने पुलिस प्रशासन की शुचिता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। युवती का कहना है कि जब वह ट्रेन से सफर कर रही थी, तब एक पुलिस इंस्पेक्टर ने उसके साथ अश्लील हरकतें और छेड़खानी की। एक महिला के लिए अपनी गरिमा की रक्षा करना सर्वोपरि होता है, और जब उसने इस दुर्व्यवहार का कड़ा विरोध किया, तो आरोप है कि उस पुलिस अधिकारी ने अपनी शक्ति का दुरुपयोग करते हुए उसे एनडीपीएस (नशीले पदार्थ) के फर्जी मामले में फंसा दिया। जस्टिस संदीप एन भट्ट की एकलपीठ ने इस मामले को अत्यंत संवेदनशील और गंभीर मानते हुए जबलपुर आईजी को मामले की गहन जांच के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि एक रक्षक ही भक्षक बन जाए, तो न्याय व्यवस्था से आम नागरिक का विश्वास उठ जाएगा।
सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल लोकेशन खोलेंगे राज
मामले की तह तक जाने के लिए हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने नैनपुर और मदनमहल रेलवे स्टेशनों के सीसीटीवी फुटेज तलब किए हैं। मदनमहल थाने के टीआई द्वारा पेश किए गए फुटेज को अब युवती और सरकारी वकील को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।इसके साथ ही, अदालत ने तकनीक का सहारा लेते हुए मोबाइल लोकेशन की जांच के आदेश भी दिए हैं। युवती और आरोपी पुलिस अधिकारी की उस समय की लोकेशन यह साफ कर देगी कि घटनाक्रम की सत्यता क्या है। एक महिला के आत्मसम्मान और उसकी स्वतंत्रता को कुचलने की कोशिश अगर वर्दी की आड़ में हुई है, तो यह आधुनिक समाज के लिए एक काला धब्बा है। आईजी को दो सप्ताह के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट अदालत में पेश करनी है।
युवती के खिलाफ पुलिस की दलील
दूसरी ओर, सरकारी पक्ष ने युवती की जमानत का विरोध करते हुए तर्क दिया है कि वह रायपुर के एक होटल में फर्जी आईडी के जरिए रुकी थी। पुलिस का दावा है कि उसे 11 जनवरी 2026 को सवा 12 किलो गांजे के साथ पकड़ा गया था। हालांकि, युवती के वकीलों का कहना है कि यह पूरी कहानी मनगढ़ंत है और उसे जबरदस्ती थाने ले जाकर मामला दर्ज किया गया। फिलहाल, कोर्ट ने युवती की जमानत अर्जी खारिज कर दी है, लेकिन जांच के द्वार खोल दिए हैं।