जबलपुर। भूमध्य सागर से उत्पन्न होने वाला एक गैर-मानसूनी मौसमी सिस्टम है, जो सर्दियों में उत्तर.-पश्चिम भारत में बारिश और पहाड़ों पर बर्फबारी लाता है। यह पश्चिम से आने वाली हवाओं के साथ नमी लाता है, जिससे रबी फसलों को फायदा होता है और तापमान में गिरावट आती है। ऐसा हालात वेस्टर्न डिस्टर्बेंस पश्चिमी विक्षोभ कहलाता है। मध्यप्रदेश इसके चपेट में है, इससे चार दिनों में बारिश के आसार बन सकते हैं।
मध्य प्रदेश में ठंड कहर बरपा रही है। कुछ दिन पहले ठंड कम हो गई थी, लेकिन उत्तर से आ रही ठंडी हवाओं ने ठंड की फिर से वापसी करा दी है। शनिवार को शहडोल, उमरिया और कटनी सबसे ठंडे इलाके रहे हैं। कटनी के करौंदी क्षेत्र में न्यूनतम तापमान 3.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया है। इसके अलावा प्रदेश के 13 जिलों में रात का पारा 10 डिग्री सेल्सियस से कम दर्ज किया गया। मौसम विभाग ने मध्य प्रदेश के 6 जिलों में शीतहलर का अलर्ट जारी किया है। तीन बड़े शहरों भोपाल, इंदौर और ग्वालियर में रात का तामपान 11 डिग्री के आसपास दर्ज किया गया है। जबलपुर में 10.8 डिग्री रिकॉर्ड किया गया। शहडोल के कल्याणपुर में तापमान 4.9 डिग्री, उमरिया में 7 डिग्री, रीवा और खजुराहो में 7.4 डिग्री, मंडला में 7.9 डिग्री और नौगांव में 8ण्8 डिग्री पारा रिकॉर्ड हुआ।
वेस्टर्न डिस्टर्बेंस का असर
मौसम विभाग का कहना है कि सोमवार 9 फरवरी से पश्चिम हिमालयी इलाकों में एक नया वेस्टर्न डिस्टबैंस एक्टिव होने वाला है, जिसका असर 12 फरवरी के बाद मध्य प्रदेश में भी देखने को मिलेगा। उस दौरान मावठा बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग का कहना है कि अगले दो दिन तक ठंड का असर बना रहेगा। इसके बाद रात और दिन के तापमान में 2 से 3 डिग्री तक बढ़ोतरी हो सकती है।
