जबलपुर - हीरापुर बंधा गांव में संत उत्तम स्वामी का बड़ा आश्रम बना हुआ है। अब इस आश्रम को लेकर नया विवाद सामने आया है। सरकारी कागजों में जिस जमीन पर आश्रम बना है, वह अभी भी कृषि भूमि (खेती की जमीन) के रूप में दर्ज है। नियमों के अनुसार खेती की जमीन पर पक्का निर्माण करने से पहले जमीन का डायवर्शन कराना और भवन निर्माण की अनुमति लेना जरूरी होता है, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
17 फरवरी को जारी खसरा रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि कागजों में वहां आज भी उड़द की फसल दर्ज है, जबकि हकीकत में करीब 1 एकड़ से ज्यादा जमीन पर पक्का आश्रम बन चुका है। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले एक साल में यहां तेजी से निर्माण हुआ।
जांच में यह भी पता चला कि जमीन दो हिस्सों में बंटी है—एक हिस्सा उत्तम स्वामी और दूसरा मंगलनाथ स्वामी के नाम है। हाल ही में यहां भागवत कथा का बड़ा आयोजन भी हुआ था, जिसकी अनुमति पर भी सवाल उठ रहे हैं।
अब जिला प्रशासन और राजस्व विभाग मामले की जांच कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि अगर नियमों का उल्लंघन मिला तो कड़ी कार्रवाई, जुर्माना या अवैध निर्माण पर बुलडोजर चलाया जा सकता है।