जबलपुर। सड़क हादसे में जान गंवाने वाले धनवंतरि नगर निवासी 40 वर्षीय नरेंद्र कुमार रजक के परिवार ने दुख की घड़ी में ऐसा फैसला लिया, जिससे कई जरूरतमंद मरीजों को जीवन की नई उम्मीद मिली है। ब्रेन डेड घोषित किए जाने के बाद परिवार ने नरेंद्र के अंगदान की सहमति दी। इसके बाद अंगों को सुरक्षित और जल्द निर्धारित स्थानों तक पहुंचाने के लिए सोमवार-मंगलवार की दरमियानी रात जबलपुर में दो अलग-अलग ग्रीन कॉरिडोर बनाए गए।
नरेंद्र कुमार रजक 31 अक्टूबर को सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुए थे। उन्हें इलाज के लिए बड़ेरिया मेट्रो प्राइम मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 2 नवंबर को चिकित्सकों ने उन्हें ब्रेन डेड घोषित किया। इसके बाद परिवार ने अंगदान का निर्णय लिया।
अस्पताल से मेडिकल कॉलेज और एयरपोर्ट तक बना रास्ता
अंगों को समय पर पहुंचाने के लिए अस्पताल से नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज और अस्पताल से डुमना विमानतल तक अलग-अलग ग्रीन कॉरिडोर तैयार किए गए। रात करीब 3:30 बजे इस व्यवस्था के तहत वाहनों को बिना रुकावट निर्धारित मार्ग से निकाला गया।
नरेंद्र का लिवर अहमदाबाद भेजा गया। उनकी एक किडनी मेट्रो अस्पताल में ही जरूरतमंद मरीज को प्रत्यारोपित की जाएगी, जबकि दूसरी किडनी मेडिकल कॉलेज भेजी गई। दोनों आंखें भी दान की गईं, जिन्हें मेडिकल कॉलेज भेजा गया। इसके अलावा उनकी त्वचा भी दान की गई है, जिसका उपयोग जरूरतमंद मरीजों के उपचार में किया जा सकेगा। चिकित्सकों के अनुसार हृदय की स्थिति प्रत्यारोपण के अनुकूल नहीं थी, इसलिए उसका उपयोग नहीं किया गया।
परिवार ने बच्चों के भविष्य के बीच लिया फैसला
नरेंद्र के भाई शिवकुमार रजक ने बताया कि हादसे के बाद परिवार के लिए यह बेहद कठिन समय था। इसके बावजूद सभी ने मिलकर अंगदान का निर्णय लिया, ताकि नरेंद्र के अंगों से दूसरे लोगों को नया जीवन मिल सके। नरेंद्र एचसीएल कंपनी में कार्यरत थे। परिवार में उनकी पत्नी पूजा रजक और 12 वर्षीय बेटा तथा 8 वर्षीय बेटी हैं।
अंगदान की पूरी प्रक्रिया में अस्पताल प्रबंधन, प्रशासन और चिकित्सा संस्थानों के बीच समन्वय रहा। अस्पताल के निदेशक सौरभ बड़ेरिया, डॉ. राजीव बड़ेरिया, कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा और एसडीएम मदन रघुवंशी सहित संबंधित टीमों की भूमिका महत्वपूर्ण रही।
जबलपुर में पहले भी बन चुके हैं ग्रीन कॉरिडोर
जबलपुर में अंगों को सुरक्षित पहुंचाने के लिए इससे पहले भी कई बार ग्रीन कॉरिडोर बनाए जा चुके हैं। 24 जुलाई 2017 को शहर में पहली बार ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया था। इसके बाद 2023 और 2025 में भी जबलपुर से दूसरे शहरों तक अंग पहुंचाने के लिए विशेष ग्रीन कॉरिडोर तैयार किए गए।





