जबलपुर। पनागर की राजुल एस्टेट कॉलोनी में रहने वाले परिवारों ने बिल्डर पर जरूरी सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराने का आरोप लगाया है। करीब 22 एकड़ में विकसित इस कॉलोनी में 484 भूखंडों की बिक्री हो चुकी है, लेकिन रहवासियों के मुताबिक अब तक कई महत्वपूर्ण विकास कार्य अधूरे हैं। मंगलवार को जनसुनवाई में राजुल एस्टेट रहवासी कल्याण समिति के पदाधिकारियों ने कलेक्टर को आवेदन सौंपकर मामले की जांच और कार्रवाई की मांग की।
समिति अध्यक्ष विकास पाण्डेय और वरिष्ठ उपाध्यक्ष दीपक पाल ने अपने अभ्यावेदन में बिल्डर दिलीप मेहता पर कॉलोनी के स्वीकृत नक्शे और निर्धारित शर्तों का पालन नहीं करने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि योजना में 58 ईडब्ल्यूएस आवास बनाए जाने थे, लेकिन इनका निर्माण नहीं कराया गया। इसी तरह पानी की व्यवस्था के लिए प्रस्तावित ओवरहेड टैंक भी अब तक तैयार नहीं हुआ है।
पंचायत की एनओसी और हैंडओवर पर सवाल
रहवासियों ने ग्राम पंचायत महगवां की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पंचायत की ओर से एनओसी जारी नहीं की गई है और कॉलोनी का औपचारिक हस्तांतरण भी नहीं हुआ है। इस संबंध में एसडीएम न्यायालय में जांच चल रही है। समिति ने मांग की है कि पंचायत सचिव कल्पना अग्निहोत्री को मूल दस्तावेजों के साथ बुलाकर स्थिति स्पष्ट कराई जाए।
मौके पर जांच कराने की मांग
समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि नगर तथा ग्राम निवेश विभाग से स्वीकृत लेआउट और कॉलोनी में मौजूद वास्तविक सुविधाओं के बीच अंतर है। रहवासियों ने प्रशासन से राजस्व अधिकारियों की मौजूदगी में पूरी कॉलोनी का निरीक्षण कराने की मांग की है, ताकि यह पता चल सके कि स्वीकृत नक्शे के अनुसार कितने काम पूरे हुए हैं और कितने बाकी हैं।
आवेदन में यह भी कहा गया है कि यदि जांच के दौरान स्वीकृत योजना के विपरीत निर्माण या विकास कार्यों में कमी पाई जाती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। रहवासियों का कहना है कि भूखंड खरीदने के बाद भी जरूरी सुविधाओं के लिए उन्हें लगातार परेशान होना पड़ रहा है। अब उनकी मांग है कि प्रशासन मामले में समयबद्ध जांच कराकर कॉलोनी की समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करे।
