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दो करोड़ से कम बजट की ‘हनुमान अंश’ ने पार किया 100 करोड़ का आंकड़ा, स्टीव जॉब्स की भारत यात्रा से मिली फिल्म की प्रेरणा


नई दिल्ली। नीम करौली बाबा यानी महाराज जी पर बनी फिल्म ‘हनुमान अंश’ इन दिनों दर्शकों के बीच चर्चा में है। बेहद कम बजट में बनी इस फिल्म ने रिलीज के 30 दिनों में 100 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई का आंकड़ा पार कर लिया है। खास बात यह है कि फिल्म ने शुरुआती 20 दिनों में करीब 12 करोड़ रुपये ही कमाए थे, लेकिन इसके बाद दर्शकों की जुबानी चर्चा और सोशल मीडिया प्रचार के कारण कमाई में अचानक बड़ा उछाल आया।

अगले 10 दिनों में फिल्म ने करीब 88 करोड़ रुपये कमाए। फिल्म की सफलता को लेकर निर्माता अनुप्रिया नागर का कहना है कि उन्होंने कभी बॉक्स ऑफिस कमाई को ध्यान में रखकर यह फिल्म नहीं बनाई थी।

विदेशी लेख से मिली फिल्म बनाने की प्रेरणा

21 वर्षीय निर्माता अनुप्रिया नागर के मुताबिक, उन्होंने कभी फिल्म बनाने के बारे में नहीं सोचा था। कॉलेज के अंतिम वर्ष में टेक कंपनियों पर रिसर्च के दौरान उन्हें स्टीव जॉब्स और नीम करौली बाबा के संबंध के बारे में जानकारी मिली।

अनुप्रिया को सबसे ज्यादा हैरानी इस बात पर हुई कि एक भारतीय संत के बारे में उन्हें जानकारी एक विदेशी लेख के माध्यम से मिली। इसके बाद उन्होंने नीम करौली बाबा के जीवन और उनके प्रभाव पर विस्तार से रिसर्च शुरू की। यही रिसर्च आगे चलकर ‘हनुमान अंश’ बनाने की वजह बनी।

पहले फिल्म को बताया जा रहा था फ्लॉप

अनुप्रिया ने बताया कि फिल्म रिलीज होने के शुरुआती दिनों में जब बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक कमाई नहीं हुई तो फिल्म को फ्लॉप तक कहा जाने लगा था। इससे उनका मनोबल भी प्रभावित हुआ।

हालांकि, धीरे-धीरे दर्शकों के बीच फिल्म की चर्चा बढ़ने लगी। सोशल मीडिया पर लोगों ने फिल्म को लेकर अपनी प्रतिक्रियाएं साझा कीं और जुबानी प्रचार का असर दिखाई देने लगा। इसके बाद फिल्म ने कमाई के मामले में तेजी पकड़ ली।

अनुप्रिया का कहना है कि फिल्म की सफलता उनके लिए किसी चमत्कार से कम नहीं है।

फिल्म की कमाई का पैसा जरूरतमंद बच्चों पर खर्च करने की इच्छा

फिल्म की सफलता से उत्साहित अनुप्रिया ने कहा कि वह अभी केवल 21 साल की हैं और इतनी बड़ी कमाई के बाद उन्हें खुद समझ नहीं आ रहा कि इस पैसे का क्या करेंगी। हालांकि, उन्होंने इच्छा जताई है कि फिल्म से मिलने वाले मुनाफे का एक हिस्सा जरूरतमंद बच्चों की मदद और दान के काम में लगाया जाए।

उन्होंने यह भी बताया कि फिल्म के निर्माण में तीन मुख्य निर्माता और सह-निर्माता शामिल रहे हैं।

स्टीव जॉब्स और नीम करौली बाबा का क्या संबंध था?

स्टीव जॉब्स वर्ष 1974 में अपने दोस्त डैन कोटके के साथ भारत आए थे। उस समय जॉब्स आध्यात्मिक स्पष्टता और जीवन के गहरे अर्थ की तलाश में थे।

दोनों ने राम दास की किताब ‘बी हियर नाउ’ पढ़ी थी। इसी किताब के माध्यम से उन्हें नीम करौली बाबा और उत्तराखंड के कैंची धाम के बारे में जानकारी मिली। इसके बाद दोनों कैंची धाम आश्रम पहुंचे।

लेकिन जब वे वहां पहुंचे तो उन्हें पता चला कि नीम करौली बाबा का 11 सितंबर 1973 को निधन हो चुका था। इसलिए जॉब्स उनसे मुलाकात नहीं कर सके।

करीब सात महीने भारत में रहे स्टीव जॉब्स

भारत यात्रा के दौरान स्टीव जॉब्स करीब सात महीने तक यहां रहे। इस दौरान उन्होंने कई धार्मिक और आध्यात्मिक स्थानों की यात्रा की। वे हरिद्वार, नैनीताल और मनाली जैसे क्षेत्रों में भी गए।

भारत में रहते हुए उन्होंने ग्रामीण जीवन और यहां की आध्यात्मिक परंपराओं को करीब से देखा। इस अनुभव का उनके विचारों पर गहरा असर पड़ा।

परमहंस योगानंद की ‘एक योगी की आत्मकथा’ भी उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण किताब रही। बताया जाता है कि भारत यात्रा के दौरान उन्होंने इसे दोबारा पढ़ा और बाद में पूरी जिंदगी में लगभग हर साल इस किताब को पढ़ते रहे।

भारत यात्रा का जॉब्स की सोच पर पड़ा असर

भारत से लौटने के बाद स्टीव जॉब्स के विचारों में काफी बदलाव आया। वे सादगी और अंतर्ज्ञान को काफी महत्व देने लगे। बाद में जेन बौद्ध धर्म से प्रभावित होकर उन्होंने सरलता को अपने सोचने और काम करने के तरीके का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया।

इसी वजह से स्टीव जॉब्स की भारत यात्रा को उनकी सोच और आगे चलकर Apple के उत्पादों की डिजाइन फिलॉसफी से भी जोड़ा जाता है।

‘हनुमान अंश’ की सफलता के पीछे क्या है वजह?

फिल्म की शुरुआती कमाई भले ही धीमी रही, लेकिन दर्शकों की सकारात्मक प्रतिक्रिया ने इसकी दिशा बदल दी। बताया गया कि एक समय फिल्म कई सिनेमाघरों से उतर चुकी थी, लेकिन बाद में बढ़ती मांग और चर्चा के कारण इसे दोबारा दर्शक मिलने लगे।

कम बजट में बनी फिल्म का 100 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई तक पहुंचना इसकी सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल है। निर्माता अनुप्रिया नागर के अनुसार, फिल्म बनाने के पीछे उनका उद्देश्य केवल व्यावसायिक सफलता नहीं था, बल्कि नीम करौली बाबा की कहानी और उनके विचारों को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाना था।

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