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भेड़ाघाट-लम्हेटाघाट में बनेगा देश का पहला जियो पार्क, 87 करोड़ की परियोजना को केंद्र की मंजूरी

 



जबलपुर। भेड़ाघाट-लम्हेटाघाट क्षेत्र में देश का पहला जियो पार्क, विश्वस्तरीय जियोलॉजिकल म्यूजियम और आधुनिक पर्यटन सुविधाएं विकसित करने की 87 करोड़ रुपये की परियोजना को केंद्र सरकार से मंजूरी मिल गई है। यह परियोजना स्वदेश दर्शन 2.0 योजना के तहत मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड के माध्यम से करीब 12 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित की जाएगी।

18 माह में पूरा करने का लक्ष्य

परियोजना को सितंबर 2026 से फरवरी 2028 के बीच पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए पर्यटन विभाग के स्वामित्व वाली करीब 12 हेक्टेयर जमीन उपलब्ध है। परियोजना की क्रियान्वयन एजेंसी मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड रहेगी।

प्राकृतिक क्षेत्र को बनाए रखने पर जोर

परियोजना में करीब 5,745 वर्गमीटर क्षेत्र में निर्माण प्रस्तावित है। वहीं कुल क्षेत्रफल के 90 प्रतिशत या उससे अधिक हिस्से को हरित रखने का लक्ष्य तय किया गया है। मौजूदा पेड़ों और प्राकृतिक भू-दृश्य को सुरक्षित रखते हुए निर्माण किया जाएगा, ताकि पर्यटकों को प्रकृति के बीच घूमने और क्षेत्र को समझने का अनुभव मिल सके।

परियोजना में स्थानीय लोगों को भी पर्यटन गतिविधियों से जोड़ने की योजना है। स्थानीय उत्पादों, हस्तशिल्प, खान-पान और पर्यटन सेवाओं में स्थानीय समुदाय की भागीदारी पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

जियोलॉजिकल म्यूजियम में कई आकर्षण होंगे

परियोजना के तहत जियोलॉजिकल म्यूजियम और इंटरप्रिटेशन सेंटर बनाया जाएगा। इसमें छह विषयगत गैलरियां और 130 से अधिक प्रदर्श प्रस्तावित हैं। इसके अलावा 3डी मॉडल, इंटरैक्टिव टच टेबल, डिजिटल पैनल और इमर्सिव थिएटर जैसी तकनीकी सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी।

परिसर में टाइटेनोसॉर स्क्वायर, डायनासोर पार्क, फॉसिल गार्डन, जियोलॉजिकल मेज, रॉक गार्डन, ट्री-टॉप वॉकवे, ग्लास फ्लोर, नेचर वॉक और व्यूइंग डेक जैसे आकर्षण भी प्रस्तावित हैं।

पर्यटकों के लिए आधुनिक सुविधाएं

परिसर में रेस्टोरेंट, फूड कोर्ट, म्यूजियम शॉप और स्थानीय उत्पादों की बिक्री के लिए रिटेल क्षेत्र बनाया जाएगा। इसके अलावा ग्लैम्पिंग टेंट आधारित इको-रिसॉर्ट, पार्किंग और टिकटिंग जैसी सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी।

म्यूजियम में बच्चों और विद्यार्थियों के साथ भू-विज्ञान के शोधार्थियों के लिए अलग-अलग तरह की अनुभव आधारित सामग्री रखी जाएगी। इसका उद्देश्य भू-विज्ञान से जुड़ी जानकारी को सरल और रोचक तरीके से लोगों तक पहुंचाना होगा।

लम्हेटा फॉर्मेशन को मिलेगा प्रमुख स्थान

लम्हेटा फॉर्मेशन भेड़ाघाट क्षेत्र की प्रमुख भू-वैज्ञानिक पहचान है। परियोजना के तहत पृथ्वी की उत्पत्ति से लेकर मध्यप्रदेश और नर्मदा घाटी के करोड़ों वर्ष पुराने भू-वैज्ञानिक इतिहास को आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्रदर्शित करने की योजना है।

मध्यप्रदेश के 13 भौगोलिक क्षेत्रों की भू-सांस्कृतिक विशेषताओं को भी म्यूजियम में प्रदर्शित किया जाएगा। प्रस्ताव में भेड़ाघाट-लम्हेटाघाट को प्राकृतिक श्रेणी में यूनेस्को विश्व धरोहर की संभावित सूची के लिए नामांकन डोजियर प्रस्तुत करने और भविष्य में यूनेस्को ग्लोबल जियोपार्क की संभावनाओं का भी उल्लेख किया गया है।

पर्यटन को नई दिशा मिलने की उम्मीद

भेड़ाघाट पहले से ही संगमरमर की चट्टानों, धुआंधार जलप्रपात, नर्मदा नदी और चौसठ योगिनी मंदिर के कारण प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल है। जियो पार्क परियोजना के बाद यहां प्राकृतिक पर्यटन के साथ विज्ञान, शिक्षा और अनुभव आधारित पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

राकेश सिंह ने जताया आभार

लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने परियोजना की मंजूरी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि भेड़ाघाट जबलपुर के साथ पूरे मध्यप्रदेश की पहचान है। जियोलॉजिकल पार्क और म्यूजियम इस पहचान को नया विस्तार देगा।

परियोजना से जुड़े प्रस्ताव के अनुसार, इससे जबलपुर को पर्यटन के क्षेत्र में नई सुविधाएं मिलेंगी। साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार, व्यापार और पर्यटन से जुड़ी गतिविधियों के बढ़ने की संभावना जताई गई है।

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