जबलपुर-उज्जैन में अलग मेडिकल यूनिवर्सिटी बनाने के निर्णय पर विरोध, फंड के बंटवारे को बताया गैरकानूनी
जबलपुर। नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने मेडिकल यूनिवर्सिटी के विभाजन और 250 करोड़ रुपये के रिजर्व फंड के प्रस्तावित बंटवारे पर कड़ी आपत्ति जताई है। मंच का आरोप है कि जबलपुर और उज्जैन में अलग-अलग मेडिकल यूनिवर्सिटी बनाने की प्रक्रिया के साथ फंड का बंटवारा नियमों के विरुद्ध किया जा रहा है। इस संबंध में मंच ने डायरेक्टर मेडिकल एजुकेशन और प्रमुख सचिव, चिकित्सा शिक्षा विभाग, भोपाल को रजिस्ट्रार डॉ. पुष्पराज सिंह के माध्यम से औपचारिक आपत्ति भेजी है।
मंच का कहना है कि पहले कृषि विश्वविद्यालय के विभाजन के दौरान दोनों संस्थानों को समान हिस्सेदारी दी गई थी, लेकिन मेडिकल यूनिवर्सिटी के मामले में ऐसा नहीं किया गया। आरोप है कि प्रस्तावित व्यवस्था में उज्जैन को अधिक लाभ दिया जा रहा है, जबकि जबलपुर के हिस्से में कम संसाधन छोड़े जा रहे हैं।
मंच ने यह भी दावा किया कि मेडिकल यूनिवर्सिटी अधिनियम में अब तक ऐसा कोई संशोधन नहीं हुआ है, जो मूलधन या रिजर्व फंड के विभाजन की अनुमति देता हो। ऐसे में वर्तमान यूनिवर्सिटी के लगभग 250 करोड़ रुपये के रिजर्व फंड का बंटवारा पूरी तरह गैरकानूनी और असंवैधानिक है।
इस संबंध में दर्ज कराई गई आपत्ति के दौरान डॉ. पी.जी. नाजपांडे, रजत भार्गव, एड. वेदप्रकाश अधौलिया, यशवंत कोष्टा, अशोक यादव, श्याम सोलंकी और एड. ब्रजेश साहू सहित कई लोग मौजूद रहे। मंच ने सरकार से इस निर्णय पर पुनर्विचार करने और प्रस्तावित फंड बंटवारे को रोकने की मांग की है।