भिंड। हिंदी सिनेमा की मशहूर फिल्म 'शोले' का खलनायक गब्बर सिंह केवल एक काल्पनिक किरदार नहीं था। बताया जाता है कि इस किरदार का नाम चंबल के कुख्यात डाकू गब्बर सिंह उर्फ गबरा से प्रेरित था, जिसका असली नाम प्रीतम सिंह गुर्जर था।
प्रीतम सिंह का जन्म भिंड जिले के डांग गांव में हुआ था। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर थी और जमीन के विवाद के बाद उसने अपराध का रास्ता अपना लिया। कुछ समय तक वह एक डाकू गिरोह के साथ रहा, लेकिन बाद में उसने अपना अलग गैंग बना लिया।
समय के साथ उसका नाम चंबल के सबसे खतरनाक डाकुओं में गिना जाने लगा। उस दौर में सरकार ने उस पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था, जो उस समय बहुत बड़ी राशि मानी जाती थी।
गब्बर सिंह पर कई गंभीर अपराधों के आरोप लगे। सबसे चर्चित घटना भिंड के एक गांव की बताई जाती है, जहां पुलिस के मुखबिर होने के शक में 21 बच्चों की हत्या किए जाने का दावा किया जाता है। इसी घटना के बाद पूरे इलाके में उसका खौफ और बढ़ गया।
उसके बारे में यह भी कहा जाता है कि वह अंधविश्वास में विश्वास करता था और अपने दुश्मनों के साथ बेहद क्रूर व्यवहार करता था। हालांकि, इन दावों का उल्लेख अलग-अलग स्रोतों में मिलता है और इनके सभी विवरण स्वतंत्र रूप से प्रमाणित नहीं हैं।
बताया जाता है कि फिल्म 'शोले' के लेखक सलीम-जावेद ने चंबल के डाकुओं से जुड़ी कहानियों और पुलिस रिकॉर्ड से प्रेरणा लेकर फिल्म के खलनायक का नाम गब्बर सिंह रखा था। इसके बाद यह नाम भारतीय सिनेमा के सबसे चर्चित खलनायकों में शामिल हो गया।
साल 1959 में तत्कालीन पुलिस अधिकारियों के नेतृत्व में चलाए गए अभियान के दौरान पुलिस और गब्बर सिंह के गिरोह के बीच मुठभेड़ हुई। इस कार्रवाई में गब्बर सिंह मारा गया और उसके साथ चंबल के एक खौफनाक अध्याय का अंत हो गया। हालांकि, उसका नाम आज भी चंबल के इतिहास और भारतीय सिनेमा दोनों में याद किया जाता है।