नई दिल्ली। लंबे इंतजार के बाद कॉमेडी फिल्म धमाल 4 सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। फिल्म का निर्देशन इंद्र कुमार ने किया है। इस बार भी दर्शकों को खजाने की तलाश, मजेदार घटनाएं, गलतफहमियां और कई हास्यपूर्ण किरदार देखने को मिलते हैं। फिल्म में अजय देवगन, अरशद वारसी, रितेश देशमुख, जावेद जाफरी, रवि किशन, संजय मिश्रा, संजीदा शेख, ईशा गुप्ता और अंजलि आनंद मुख्य भूमिकाओं में नजर आए हैं।
फिल्म पूरी तरह मनोरंजन पर आधारित है। इसमें दर्शकों को लगातार हंसाने की कोशिश की गई है। हालांकि, कहानी बहुत मजबूत नहीं है और कई जगह पहले देखी हुई लगती है। यदि आप सिर्फ हल्की-फुल्की कॉमेडी देखने के लिए थिएटर जा रहे हैं, तो यह फिल्म आपको पसंद आ सकती है। लेकिन यदि आप नई कहानी या दमदार पटकथा की उम्मीद लेकर जाएंगे, तो थोड़ी निराशा हो सकती है।
खजाने की तलाश पर आधारित है कहानी
फिल्म की शुरुआत एक पुराने खजाने की कहानी से होती है। बताया जाता है कि करीब 100 साल पहले एक बड़ा खजाना कहीं छिपा दिया गया था। उस खजाने तक पहुंचने का नक्शा समय के साथ गायब हो जाता है। वर्षों बाद उस खजाने से जुड़ा एक महत्वपूर्ण सुराग सामने आता है, लेकिन परिस्थितियां ऐसी बनती हैं कि नक्शा पूरी तरह नष्ट हो जाता है।
इसके बाद कहानी में कई किरदार अलग-अलग कारणों से उस खजाने की तलाश में निकल पड़ते हैं। सभी का मकसद एक ही है, लेकिन रास्ते अलग-अलग हैं। इसी दौरान उनके बीच मजेदार घटनाएं, गलतफहमियां, पीछा, झगड़े और हास्य से भरपूर कई दृश्य देखने को मिलते हैं। फिल्म का पहला हिस्सा मुख्य रूप से किरदारों को स्थापित करने और खजाने की खोज शुरू होने पर केंद्रित है।
दूसरे हिस्से में सभी पात्र खजाने तक पहुंचने की कोशिश करते हैं। इस दौरान कई मोड़ आते हैं और अंत में फिल्म भावनात्मक अंदाज में समाप्त होती है। हालांकि, क्लाइमेक्स थोड़ा मेलोड्रामा वाला महसूस होता है और कहानी ज्यादा प्रभाव नहीं छोड़ पाती।
कॉमेडी है फिल्म की सबसे बड़ी ताकत
फिल्म की सबसे बड़ी खासियत इसकी कॉमेडी है। कई दृश्य ऐसे हैं जो दर्शकों को खुलकर हंसाते हैं। खासकर अरशद वारसी, रितेश देशमुख और जावेद जाफरी की टाइमिंग शानदार है। तीनों कलाकार अपनी कॉमिक एक्टिंग से फिल्म को लगातार मनोरंजक बनाए रखते हैं।
संजय मिश्रा भी अपने छोटे लेकिन प्रभावी किरदार में दर्शकों का ध्यान खींचते हैं। रवि किशन को जितना स्क्रीन टाइम मिला, उन्होंने उसमें अच्छा प्रदर्शन किया है। अजय देवगन अपने किरदार में सहज नजर आते हैं, हालांकि इस फिल्म में उनका रोल बाकी कलाकारों की तुलना में ज्यादा प्रभावशाली नहीं लगता।
निर्देशन में नया प्रयोग नहीं
निर्देशक इंद्र कुमार ने फिल्म को उसी अंदाज में बनाया है, जिसके लिए यह श्रृंखला पहचानी जाती है। उन्होंने कॉमेडी और मनोरंजन पर पूरा ध्यान दिया है, लेकिन कहानी में कोई बड़ा नया प्रयोग देखने को नहीं मिलता। कई घटनाएं पहले देखी हुई लगती हैं और कुछ हिस्सों में फिल्म की रफ्तार भी धीमी हो जाती है।
फिल्म के संवाद कई जगह हंसी पैदा करते हैं और कुछ एक्शन दृश्यों को भी मजाकिया अंदाज में फिल्माया गया है। हालांकि, पटकथा थोड़ी और मजबूत होती तो फिल्म का असर और बेहतर हो सकता था।
तकनीकी पक्ष भी ठीक-ठाक
फिल्म का बैकग्राउंड म्यूजिक कहानी के साथ तालमेल बनाता है। सिनेमैटोग्राफी अच्छी है और लोकेशन भी आकर्षक दिखाई गई हैं। एडिटिंग कुछ जगह और बेहतर हो सकती थी, क्योंकि कुछ दृश्य जरूरत से ज्यादा लंबे महसूस होते हैं। फिल्म का निर्माण स्तर अच्छा है और बड़े पर्दे पर इसका प्रस्तुतिकरण प्रभावी नजर आता है।
देखें या नहीं?
यदि आप बिना ज्यादा दिमाग लगाए परिवार या दोस्तों के साथ हल्की-फुल्की कॉमेडी फिल्म देखना चाहते हैं, तो धमाल 4 आपके लिए एक अच्छा विकल्प हो सकती है। फिल्म का उद्देश्य सिर्फ मनोरंजन करना है और इसमें कई ऐसे पल हैं जो आपको हंसने पर मजबूर कर देंगे।
लेकिन यदि आप नई कहानी, मजबूत पटकथा या अलग तरह का सिनेमा देखने की उम्मीद कर रहे हैं, तो यह फिल्म आपकी अपेक्षाओं पर पूरी तरह खरी नहीं उतर सकती। कुल मिलाकर यह एक मनोरंजक कॉमेडी फिल्म है, जो अपने कलाकारों की शानदार कॉमिक टाइमिंग की वजह से देखने लायक बनती है।
रेटिंग: 2.5/5