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विवादों के बाद राम मंदिर ट्रस्ट में बदलाव की तैयारी, पारदर्शिता बढ़ाने पर जोर

 




अयोध्या। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में हाल के विवादों के बाद व्यवस्थाओं में बदलाव की प्रक्रिया शुरू हो गई है। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि ने कहा कि मंदिर की कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और त्रुटिरहित बनाने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि केवल किसी पद से इस्तीफा देने से समस्याओं का समाधान नहीं होता, बल्कि व्यवस्थाओं में सुधार और जवाबदेही सुनिश्चित करना ज्यादा जरूरी है। मंदिर प्रबंधक के पद को लेकर उन्होंने बताया कि गोपाल राव को पहले ही सूचित कर दिया गया है कि वे अब इस जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं करेंगे।

स्वामी गोविंद देव गिरि ने बताया कि मंदिर निर्माण शुरू होने के बाद से ट्रस्ट को अब तक करीब 3,200 करोड़ रुपये की आय प्राप्त हुई है। निर्माण कार्य और अन्य खर्चों के बाद भी ट्रस्ट के पास लगभग 1,800 करोड़ रुपये शेष हैं। उन्होंने कहा कि दान और आर्थिक मामलों को लेकर लोगों के मन में जो भ्रम पैदा हुआ है, उसे दूर करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

उन्होंने भरोसा जताया कि जल्द ही स्थिति स्पष्ट हो जाएगी और ट्रस्ट पहले की तरह सुचारु रूप से कार्य करेगा। चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि स्थायी समाधान व्यवस्थाओं में सुधार है। इसके लिए ऐसी प्रणाली विकसित की जाएगी, जिसमें पारदर्शिता और जवाबदेही को प्राथमिकता दी जाए।

चंपत राय के बारे में पूछे गए सवाल पर स्वामी गोविंद देव गिरि ने कहा कि उनका उनसे वर्षों पुराना संबंध है और वे उन्हें व्यक्तिगत रूप से जानते हैं। उनके अनुसार कार्रवाई कार्यशैली को लेकर हुई है, न कि चरित्र या ईमानदारी पर सवाल उठाने के लिए। उन्होंने कहा कि आर्थिक अनियमितताओं से जुड़े आरोपों को वे सही नहीं मानते।

उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी संस्था में समय-समय पर कार्यप्रणाली की समीक्षा जरूरी होती है। इससे व्यवस्था मजबूत होती है और लोगों का भरोसा बना रहता है। वहीं चढ़ावे से जुड़े मामलों पर उन्होंने कहा कि विशेष जांच दल (एसआईटी) की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही इस विषय पर टिप्पणी की जाएगी।

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