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मूंग खरीदी शुरू होते ही उठे सवाल, मझौली के वेयरहाउस चयन और पाटन के उपार्जन केंद्र पर किसानों की नाराजगी





जबलपुर।  समर्थन मूल्य पर मूंग खरीदी की प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही उपार्जन केंद्रों के चयन को लेकर विवाद गहराने लगा है। मझौली क्षेत्र में पिताश्री वेयरहाउस को उपार्जन केंद्र बनाए जाने और पाटन तहसील के किसानों के लिए केंद्र को कटंगी क्षेत्र में स्थानांतरित किए जाने पर किसानों ने आपत्ति जताई है।

मझौली स्थित पिताश्री वेयरहाउस का नाम सामने आने के बाद किसानों और स्थानीय लोगों के बीच चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। आरोप लगाए जा रहे हैं कि इस वेयरहाउस का संबंध ऐसे समूह से है, जिसका नाम वर्ष 2023 के मूंग खरीदी विवाद में भी सामने आ चुका है। किसानों का कहना है कि जिन मामलों की जांच अभी तक पूरी नहीं हुई है, उनसे जुड़े संस्थानों को दोबारा जिम्मेदारी सौंपना कई सवाल खड़े करता है।

किसानों के अनुसार मझौली क्षेत्र में अन्य उपलब्ध और उपयुक्त वेयरहाउस भी मौजूद हैं, लेकिन इसके बावजूद विवादों से जुड़े प्रतिष्ठानों को प्राथमिकता दिए जाने से प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। किसानों ने उपार्जन प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए चयन प्रक्रिया की समीक्षा की मांग की है।

इधर पाटन तहसील के किसानों ने भी उपार्जन केंद्र को कटंगी स्थित रुद्रास वेयरहाउस में स्थानांतरित किए जाने का विरोध किया है। उनका कहना है कि पाटन एक बड़ा कृषि क्षेत्र है और यहां के किसानों को अपनी उपज लेकर दूरस्थ केंद्र तक पहुंचना पड़ेगा, जिससे परिवहन खर्च बढ़ेगा और समय की भी बर्बादी होगी।

किसानों का आरोप है कि सहकारिता विभाग द्वारा पहले पाटन क्षेत्र में ही उपार्जन केंद्र स्थापित करने का प्रस्ताव दिया गया था, लेकिन अंतिम निर्णय में इसे बदल दिया गया। इससे छोटे और सीमांत किसानों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

किसानों ने जिला प्रशासन से उपार्जन केंद्रों के चयन में पारदर्शिता बरतने और पाटन क्षेत्र में ही सुविधाजनक केंद्र उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए अनावश्यक दूरी तय न करनी पड़े।

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