इंदौर। इस्कॉन मंदिर में इन दिनों श्रद्धालुओं को भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के दर्शन नहीं हो रहे हैं। परंपरा के अनुसार तीनों भगवान अस्वस्थ माने जाते हैं और गर्भगृह में पुजारी उनकी विशेष सेवा और देखभाल कर रहे हैं।
भगवान का नियमित रूप से थर्मामीटर से तापमान मापा जा रहा है। साथ ही उन्हें आयुर्वेदिक काढ़ा पिलाया जा रहा है। पुजारियों ने भगवान को कंबल ओढ़ाया हुआ है और भोग के समय औषधियां भी दी जा रही हैं।
भगवान के लिए अदरक, शहद, लौंग, काली मिर्च, दालचीनी, सोंठ सहित कई आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों से विशेष काढ़ा तैयार किया गया है। ज्वर की अवस्था में उन्हें खिचड़ी और हल्का भोजन अर्पित किया जा रहा है।
पुजारियों के अनुसार यह परंपरा सभी जगन्नाथ मंदिरों में निभाई जाती है। स्नान पूर्णिमा के दिन भगवान को पवित्र तीर्थों और नदियों के जल से स्नान कराया जाता है, जिसके बाद उन्हें प्रतीकात्मक रूप से ज्वर आ जाता है। इसके बाद 15 दिनों तक गर्भगृह में विश्राम कराया जाता है तथा काढ़ा और औषधियों से उपचार किया जाता है।
इस अवधि में श्रद्धालुओं को भगवान के दर्शन नहीं होते। 15 दिनों के विश्राम के बाद भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा भव्य रथयात्रा के माध्यम से भक्तों को दर्शन देते हैं। इस वर्ष भगवान 19 जुलाई को रथयात्रा के दौरान श्रद्धालुओं के बीच दर्शन देने निकलेंगे।