दिल्ली में हुए हालिया अग्निकांड के बाद जबलपुर प्रशासन ने शहर में फायर सेफ्टी व्यवस्थाओं की जांच तेज कर दी है। नगर निगम अब तक करीब 350 भवनों, होटलों और व्यावसायिक संस्थानों को नोटिस जारी कर चुका है। अग्नि सुरक्षा नियमों के पालन की निगरानी के लिए पांच सदस्यीय विशेष टीम भी बनाई गई है।
शहर में कई होटल, गोदाम और व्यावसायिक भवन ऐसे हैं जहां फायर फाइटिंग सिस्टम या तो मौजूद नहीं हैं या उनकी स्थिति संतोषजनक नहीं है। खासतौर पर 50 प्रतिशत से अधिक होटल संकरी गलियों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में संचालित हो रहे हैं, जहां आग लगने पर दमकल वाहनों की पहुंच मुश्किल हो सकती है।
नियमों के अनुसार 15 मीटर से अधिक ऊंचे या 500 वर्गमीटर से बड़े भवनों के लिए फायर एनओसी अनिवार्य है, लेकिन कई संस्थान अभी भी सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन नहीं कर रहे हैं।
फायर विभाग ने मदनमहल, गंगासागर, गुलौआ, गुरंदी बाजार, मालवीय चौक, गोल बाजार, उखरी और दमोह नाका जैसे क्षेत्रों को संवेदनशील माना है। इन इलाकों में बड़ी संख्या में लकड़ी, प्लाईवुड और टायर गोदाम संचालित हैं, जिससे आग लगने की स्थिति में बड़ा नुकसान हो सकता है।
जबलपुर में 150 से अधिक होटल संचालित हैं। इनमें कई बड़े और मध्यम श्रेणी के होटल शामिल हैं, जिनकी सुरक्षा व्यवस्थाओं की जांच की जा रही है। नगर निगम का कहना है कि निरीक्षण लगातार जारी है और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल नोटिस जारी करना पर्याप्त नहीं है। नियमित फायर ऑडिट, सुरक्षा उपकरणों की जांच और मॉक ड्रिल जैसी गतिविधियां भी जरूरी हैं, ताकि भविष्य में किसी बड़े हादसे को रोका जा सके।