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रिश्वत लेते पकड़े गए रेलवे इंजीनियर निलंबित, 3 दिन की सीबीआई रिमांड पर भेजे गए

 



जबलपुर। पश्चिम मध्य रेलवे के जबलपुर रेल मंडल से जुड़े एक बड़े भ्रष्टाचार मामले में रेलवे के डिप्टी मुख्य अभियंता (कंस्ट्रक्शन-2) नारायण सिंह बुंदेला को रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़े जाने के बाद रेलवे प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की जबलपुर इकाई ने उन्हें एक लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था। मामले को गंभीर मानते हुए रेलवे ने उन्हें वर्तमान पद से हटा दिया है।

जानकारी के अनुसार नारायण सिंह बुंदेला भोपाल में पदस्थ थे और उनके कार्यक्षेत्र में कटनी-बीना रेलखंड सहित कई निर्माण कार्य शामिल थे। सागर में रेलवे के निर्माण कार्यों से जुड़े एक ठेकेदार ने सीबीआई से शिकायत की थी कि काम पूरा होने के बाद जमा सुरक्षा राशि (सिक्योरिटी मनी) वापस करने के एवज में बुंदेला एक लाख रुपये की रिश्वत मांग रहे हैं।

शिकायत की पुष्टि होने के बाद सीबीआई ने योजना बनाकर कार्रवाई की। 4 जून की रात सागर में एक होटल के बाहर सीबीआई अधिकारियों ने जाल बिछाया। जैसे ही ठेकेदार ने आरोपी अधिकारी को रिश्वत की राशि सौंपी, टीम ने तुरंत उसे रंगे हाथों पकड़ लिया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को जबलपुर लाया गया, जहां सीबीआई ने विशेष अदालत में पेश कर रिमांड की मांग की।

सीबीआई ने अदालत से पूछताछ और मामले की गहराई से जांच के लिए तीन दिन की रिमांड मांगी थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष अदालत ने आरोपी अधिकारी को तीन दिन की सीबीआई कस्टडी में भेजने की अनुमति दे दी। यह रिमांड 8 जून तक प्रभावी रहेगी। इस दौरान सीबीआई आरोपी से पूछताछ कर रिश्वतखोरी से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच करेगी।

रेलवे प्रशासन ने भी मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए नारायण सिंह बुंदेला को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। फिलहाल उनकी निलंबन अवधि के दौरान नई पदस्थापना संबंधी जानकारी सामने नहीं आई है।

सीबीआई अब यह भी जांच कर रही है कि रिश्वतखोरी के इस मामले में कोई अन्य अधिकारी या कर्मचारी शामिल तो नहीं है। वहीं रेलवे विभाग ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या संरक्षण नहीं दिया जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

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