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कछपुरा मालगोदाम के धूल प्रदूषण पर NGT सख्त, रेलवे और प्रदूषण बोर्ड को नोटिस

 


जबलपुर। शहर के कछपुरा मालगोदाम से फैल रहे धूल प्रदूषण के मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने कड़ा रुख अपनाया है। लगातार बढ़ते प्रदूषण और स्थानीय लोगों की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए ट्रिब्यूनल ने रेलवे, मध्य प्रदेश शासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति शेवकुमार सिंह और एक्सपर्ट मेंबर डॉ. ए. सेंथिल वेल की पीठ में हुई।

यह कार्रवाई नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के डॉ. पी.जी. नाजपांडे और रजत भार्गव द्वारा दायर अवमानना याचिका पर की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि मालगोदाम संचालन के दौरान धूल और प्रदूषण रोकने के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। ट्रिब्यूनल ने संबंधित विभागों को चार सप्ताह के भीतर जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 11 अगस्त को होगी।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि कछपुरा मालगोदाम घनी आबादी वाले क्षेत्र के बेहद करीब स्थित है। यहां से उड़ने वाली धूल आसपास के स्कूलों, ऐतिहासिक गुलौआ तालाब और ग्रीन बेल्ट क्षेत्र को प्रभावित कर रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार लगभग 50 हजार से अधिक नागरिक इस प्रदूषण से परेशान हैं और उनके स्वास्थ्य पर इसका गंभीर असर पड़ रहा है।

बताया गया है कि ट्रिब्यूनल ने 7 अप्रैल 2025 को भी प्रदूषण नियंत्रण के संबंध में निर्देश जारी किए थे, लेकिन अब तक उनका पूरी तरह पालन नहीं किया गया। इसके बावजूद मालगोदाम में भारी वाहनों की आवाजाही और माल लोडिंग-अनलोडिंग का कार्य जारी है, जिससे क्षेत्र में लगातार धूल उड़ रही है।

अधिवक्ता प्रभात यादव और तरुण रावत ने ट्रिब्यूनल को बताया कि 5 अप्रैल 2023 को मालगोदाम संचालन के लिए जारी कंसेंट ऑर्डर में प्रदूषण नियंत्रण की कई शर्तें तय की गई थीं। आरोप है कि तीन साल बीतने के बाद भी नियमों के उल्लंघन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि धूल प्रदूषण के कारण सांस संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है और लोगों का जीवन प्रभावित हो रहा है। अब लोगों को उम्मीद है कि NGT के सख्त रुख के बाद संबंधित विभाग प्रभावी कदम उठाएंगे।

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