जबलपुर। पश्चिम मध्य रेलवे ने रेलकर्मियों और उनके परिवारों के इलाज को लेकर नए सख्त नियम लागू किए हैं। मुख्यालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार, 1 मई से बिना UMMID कार्ड के किसी भी कर्मचारी को निजी अस्पताल के लिए रेफर नहीं किया जाएगा।
हालांकि यह डिजिटल व्यवस्था पिछले एक साल से लागू है, लेकिन अब तक कई जगह कागजी रेफरल का इस्तेमाल हो रहा था। अब इसे पूरी तरह बंद करते हुए डिजिटल सिस्टम को अनिवार्य कर दिया गया है।
क्या रखें ध्यान
रेलवे ने कर्मचारियों को कुछ जरूरी निर्देश दिए हैं—
कार्ड अपडेट रखें: UMMID कार्ड की वैधता समय-समय पर जांचें।
मोबाइल नंबर सही रखें: परिवार के सभी सदस्यों के नंबर अपडेट होना जरूरी है।
OTP से सत्यापन: मरीज का रजिस्ट्रेशन UMMID नंबर से होगा और मोबाइल पर आए OTP से ही अस्पताल में एंट्री मिलेगी।
आपात स्थिति में भी यही नियम
अगर इमरजेंसी में मरीज सीधे निजी अस्पताल पहुंचता है, तब भी OTP के जरिए सत्यापन होगा। अस्पताल भर्ती के बाद रेलवे अस्पताल से ऑनलाइन मंजूरी मांगेगा, जिसे 24 घंटे में स्वीकृत या अस्वीकृत किया जाएगा।
मरीजों को बड़ी राहत
चक्कर खत्म: अब रेफरल के लिए बार-बार रेलवे अस्पताल नहीं जाना पड़ेगा।
कैशलेस इलाज: डिस्चार्ज और बिलिंग पूरी तरह डिजिटल होगी, मरीज से एडवांस नहीं लिया जाएगा।
पारदर्शिता बढ़ेगी: पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होने से साफ-सफाई और पारदर्शिता बनी रहेगी।