जबलपुर। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार के उस अहम आदेश को बरकरार रखा है, जिसमें 15 साल से अधिक पुरानी कमर्शियल बसों के संचालन पर रोक लगाई गई है। जस्टिस विशाल मिश्रा की सिंगल बेंच ने बस ऑपरेटरों की सभी 10 याचिकाएं खारिज कर दीं।
क्या है मामला
मध्यप्रदेश सरकार ने 14 नवंबर 2025 को आदेश जारी कर 15 साल से ज्यादा पुरानी व्यावसायिक बसों को सड़कों से हटाने के निर्देश दिए थे। प्रदेश में करीब 899 बसें ऐसी हैं, जो तय आयु सीमा पार कर चुकी हैं। बस संचालकों ने इसे कोर्ट में चुनौती देते हुए कहा था कि उनके पास वैध फिटनेस और परमिट मौजूद हैं।
कोर्ट ने क्या कहा
कोर्ट ने साफ किया कि—
सरकार को परिवहन नीति बनाने का पूरा अधिकार है।
यात्री सुरक्षा और पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए ऐसे फैसले जरूरी हैं।
नियमों में संशोधन पहले ही वैध माना जा चुका है, इसलिए आदेश भी सही है।
कहां कितनी पुरानी बसें
परिवहन विभाग के अनुसार—
सबसे ज्यादा पुरानी बसें जबलपुर संभाग में हैं।
सबसे कम रीवा संभाग में पाई गई हैं।
परिवहन सचिव मनीष सिंह ने इन बसों की सूची परिवहन आयुक्त को सौंप दी है। अब जल्द ही इनके परमिट रद्द करने या जब्ती की कार्रवाई शुरू होगी।
बस ऑपरेटरों को झटका
इस फैसले से पुराने वाहनों पर निर्भर बस संचालकों को बड़ा आर्थिक झटका लगा है। अब उन्हें नए वाहन खरीदने होंगे या फिर अपना व्यवसाय बंद करना पड़ सकता है।